महाकुंभ में लाखों नागा साधु पहुंचे हैं जिनमें पुरुष और महिलाएं दोनों शामिल हैं



पुरुष नागा साधु पूरी तरह नग्न रहते हैं लेकिन महिला नागा साधु ऐसा नहीं करतीं



महिला नागा साधु नग्न नहीं रहतीं वे बिना सिले गेरुआ रंग का एक कपड़ा पहनती हैं



इस कपड़े को गंती कहा जाता है जो महिलाओं को नागा साधु बनने के बाद पहनने की अनुमति होती है



महिला नागा साधु बनने के लिए 6 से 12 साल तक ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी होता है



महिला नागा साधु बनने के बाद उन्हें माथे पर तिलक लगाना होता है



महिला नागा साधु बनने के लिए महिला गुरू से अनुमति प्राप्त करनी होती है



नागा साधु बनने के बाद महिला को सांसारिक मोह त्यागने के लिए पिंडदान करना पड़ता है



महिला नागा साधु का संसार से मोह खत्म हो जाता है और वह खुद को पूजा में समर्पित करती है



नागा साधु बनने के बाद महिला पूरी तरह से ईश्वर को समर्पित हो जाती है.