साइबर फ्रॉड में कैसे होता है डार्क वेब का इस्तेमाल? 99% लोगों को नहीं पता ये सच्चाई
Published by: एबीपी टेक डेस्क
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डार्क वेब इंटरनेट का वह हिस्सा है जो सामान्य ब्राउज़र्स (जैसे गूगल क्रोम) से एक्सेस नहीं किया जा सकता. इसे एक्सेस करने के लिए विशेष सॉफ्टवेयर जैसे Tor की आवश्यकता होती है.
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डार्क वेब को सर्च इंजन द्वारा इंडेक्स नहीं किया जाता इसलिए यह सामान्य उपयोगकर्ताओं की पहुंच से बाहर रहता है.
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यहां गतिविधियां पूरी तरह गुप्त होती हैं. उपयोगकर्ताओं और उनकी लोकेशन को ट्रैक करना मुश्किल होता है, इसलिए इसका दुरुपयोग किया जाता है.
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डार्क वेब पर ड्रग्स, हथियार, और नकली दस्तावेज जैसे अवैध सामान बेचे जाते हैं. यह साइबर अपराधियों का पसंदीदा ठिकाना है.
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डार्क वेब पर हैकर्स चोरी किए गए बैंक डिटेल्स, क्रेडिट कार्ड, और अन्य संवेदनशील डेटा को बेचते हैं.
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यहां से रैनसमवेयर और वायरस खरीदे और बेचे जाते हैं जिनका इस्तेमाल कंपनियों और व्यक्तियों पर साइबर हमलों के लिए किया जाता है.
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डार्क वेब पर हिटमैन (सुपारी किलिंग), फेक आईडी, और डार्क हैकिंग सेवाओं की पेशकश की जाती है.
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डार्क वेब को कुछ लोग गोपनीयता और स्वतंत्रता के लिए इस्तेमाल करते हैं लेकिन इसका अधिकतर उपयोग अवैध गतिविधियों के लिए होता है.
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डार्क वेब पर ट्रांजैक्शन बिटकॉइन और अन्य क्रिप्टोकरेंसी के जरिए होते हैं जिससे अपराधियों को ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है.
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डार्क वेब पर जाने से आपका डाटा और डिवाइस हैकिंग और मालवेयर के जोखिम में पड़ सकता है. इसे एक्सेस करना अवैध और खतरनाक हो सकता है.