पनडुब्बियों से संचार के लिए VLF और ELF वाली रेडियो तरंगों का उपयोग किया जाता है क्योंकि ये पानी में अधिक गहराई तक जा सकती हैं.

Published by: एबीपी टेक डेस्क
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जब उच्च गति के डेटा की आवश्यकता होती है तो पनडुब्बियां सतह के करीब आकर या टेलीस्कोपिक एंटीना निकालकर उपग्रह या रेडियो संचार से जुड़ती हैं.

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पनडुब्बियां उपग्रहों के जरिए सिग्नल प्राप्त कर सकती हैं लेकिन इसके लिए उन्हें सतह के करीब आना पड़ता है.

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पानी के अंदर ध्वनि तरंगें (सोनार) रेडियो तरंगों की तुलना में अधिक दूरी तय कर सकती हैं, इसलिए समुद्री संचार में इनका उपयोग किया जाता है.

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यह एक स्वचालित उपकरण होता है जिसे पनडुब्बी द्वारा छोड़ा जाता है और यह सतह पर जाकर सिग्नल प्राप्त कर पनडुब्बी को ट्रांसमिट करता है.

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समुद्री संचार में फाइबर ऑप्टिक्स का उपयोग होता है जिससे तेज और सुरक्षित डेटा ट्रांसमिशन संभव होता है.

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नई तकनीकों में ब्लू-ग्रीन लेजर का उपयोग किया जाता है जो पानी में गहराई तक जाकर डेटा ट्रांसफर करने में मदद करता है.

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पनडुब्बियां सतह के करीब आकर बहुत तेजी से संचारित करने के लिए डेटा बर्स्ट तकनीक का उपयोग करती हैं जिससे ट्रैकिंग का जोखिम कम होता है.

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नौसेना पनडुब्बियों को निर्देश देने और संचार के लिए सोनार सिस्टम का उपयोग करती है, जो ध्वनि तरंगों से संदेश भेजता है.

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कई संचार प्रणालियां गोपनीय होती हैं और सैन्य उद्देश्यों के लिए विकसित की जाती हैं, जिससे पनडुब्बियों की लोकेशन गुप्त रहती है.

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