पुत्र ने ख़ुशी-ख़ुशी 14 वर्ष का वनवास चुना.
पिता ने उफनती यमुना पार की.
संबंध पूरे ब्रह्मांड को ऊर्जा देता है.
दोनों पुत्र सृष्टि के सबसे बड़े न्यायाधीश बने.
को बुद्धि और शौर्य का पाठ सिखाया.
उनके पुत्र, जिन्होंने धर्मराज की स्थापना की.
से आगे चलकर 'रघुकुल' नाम प्रसिद्ध हुआ.
आज्ञापालन से जुड़ा एक ऐतिहासिक रिश्ता.
ने आजीवन ब्रह्मचर्य की भीषण प्रतिज्ञा ली.
चक्रव्यूह भेदकर पिता का नाम अमर किया.