माता सती दक्ष प्रजापति की पुत्री

और भगवान शिव की पहली पत्नी थीं.

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वह देवी शक्ति का मानव रूप थीं और उन्होंने अपने पिता

दक्ष के यज्ञ में पति (शिव) का अपमान न सह पाने के कारण आत्म दाह कर लिया था.

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उनकी मृत्यु के बाद, भगवान शिव ने उनके शरीर को

अपने कंधे पर उठाकर तांडव करना शुरू कर दिया था.

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इस विनाशकारी स्थिति को देखते हुए,

भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर को 51 भागों में काट दिया.

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भगवान विष्णु ने माता सती के 51 टुकड़े इसलिए किए थे क्योंकि शिव उनके मृत शरीर को लेकर विनाशकारी तांडव कर रहे थे,

जिससे पूरे ब्रह्मांड को प्रलय का खतरा था.

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पिता प्रजापति दक्ष के यज्ञ में हुए अपमान से

दुखी होकर माता सती ने यज्ञ की अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए थे.

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इस घटना से व्यथित भगवान शिव ने माता सती के मृत शरीर को लेकर विनाश का तांडव शुरू कर दिया,

जिससे पूरे ब्रह्मांड में प्रलय आ गई.

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इस प्रलय को रोकने के लिए,

भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र का उपयोग करके सती के शरीर को टुकड़ों में काट दिया.

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ये 51 टुकड़े अलग-अलग स्थानों पर गिरे,

और उन्हीं स्थानों पर आज 51 शक्तिपीठ स्थापित हैं, जहां देवी सती के अंग गिरे थे.

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