हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को पापनाशक और मोक्षदायिनी कहा गया है.



पद्म पुराण और स्ंकद पुराण के मुताबिक इस दिन चावल खाने की मनाही होती है.



मान्यता है कि चावल में जल तत्व होता है, जो आलस को बढ़ाता है.



व्रत का मूल उद्देश्य इंद्रियों पर नियंत्रण रखना होता है.



आलस्य के कारण पूजा-पाठ और ध्यान भंग होता है.



शास्त्रों के मुताबिक चावल खाने से व्रत का पुण्य कम होता है.



माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल खाने से अगले जन्म में दरिद्रता आती है.



व्रत में मात्र फलाहार और सात्त्विक भोजन करने का ही निर्देश है.



संतों के मुताबिक चावल खाने से व्रती का संकल्प कमजोर होता है.



इस वजह से एकादशी के दिन चावल खाने की मनाही होती है.