गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा... फैज की बर्थ एनिवर्सरी पर पढ़ें उनके बेहतरीन शेर

Published by: एबीपी लाइव
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मशहूर शायर फैज अहमद फैज की आज बर्थ एनिवर्सरी (13 फरवरी 1911) है

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आइए वैलेंटाइन वीक में आपको फैज के इश्क से लबरेज बेहतरीन शेर से रूबरू कराते हैं

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गर बाज़ी इश्क़ की बाज़ी है जो चाहो लगा दो डर कैसा, गर जीत गए तो क्या कहना हारे भी तो बाज़ी मात नहीं

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और भी दुख हैं ज़माने में मोहब्बत के सिवा, राहतें और भी हैं वस्ल की राहत के सिवा

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और क्या देखने को बाक़ी है, आप से दिल लगा के देख लिया

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दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के, वो जा रहा है कोई शब-ए-ग़म गुज़ार के

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उठ कर तो आ गए हैं तिरी बज़्म से मगर, कुछ दिल ही जानता है कि किस दिल से आए हैं

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शाम-ए-फ़िराक़ अब न पूछ आई और आ के टल गई, दिल था कि फिर बहल गया जाँ थी कि फिर सँभल गई

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करो कज जबीं पे सर-ए-कफ़न मिरे क़ातिलों को गुमाँ न हो, कि ग़ुरूर-ए-इश्क़ का बाँकपन पस-ए-मर्ग हम ने भुला दिया

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