बाबर की बेटी ने क्यों ठुकराया ऑटोमन सुल्तान का शाही फरमान



बाबर की बेटी गुलबदन बेगम ने साल 1576 में अपने भतीजे अकबर के सामने हज की पेशकश रखी



अकबर ने दो मुगल जहाजों के साथ गुलबदन बेगम को हज के लिए रवाना कर दिया



गुलबदन बेगम अपने साथ सोने चांदी से भरे बक्से लेकर निकली ताकि खैरात बांटी जा सके



जब गुलबदन मक्का पहुंची तो उन्होंने चार साल तक वहीं रहने का फैसला किया



गुलबदन बेगम और उनकी साथियों ने वहां रहकर दान देना शुरू कर दिया



राजकुमारी की इस दयालुता के बारे में ऑटोमन सुल्तान मुराद को पता चला



ऑटोमन सुल्तान मुराद इस बात से नाराज हो गया और इसे अकबर की राजनीति शक्ति मानने लगा



सुल्तान ने गुलबदन बेगम और उनकी साथी महिलाओं को अरब से बेदखल करने को कहा



गुलबदन बेगम अपनी बात पर अडिग रही और फरमान मानने से इनकार कर दिया