मुगल शहजादियों को कई तरह की सुविधाएं दी जाती थीं

मुगल में एक शहजादी व्यापार भी किया करती थीं

इस शहजादी ने अपनी जिंदगी में खूब निपुणता कमाई

जहांआरा के पास बड़ी दौलत और जागीर थी

वह कई जहाजों और बाजार के व्यापार भी करती थीं

जहांआरा को औरंगजेब ने पादशाह बेगम बनाया था

पादशाह बेगम के तौर पर इन्हें चार लाख रूपये वार्षिक ग्रांट दी गई

इस शहजादी को किले की एक सुंदर हवेली दी गई

उन्हें सूरत शहर जागीर में मिला था

साथ ही सूरत तट से होने वाली कमाई सारी बेगम की हुआ करती थी