शारदीय नवरात्रि के पहले दिन से नवमी तक कलश स्थापना
के साथ अखंड ज्योति जलाई जाती है.


अखंड ज्योति को सुख, सौभाग्य, समृद्धि का कारक माना जाता है.



अखंड ज्योति में घी का इस्तेमाल किया जाता है. इसके लिए
रुई की बाती उपयोग में लें.


अखंड ज्योति की बाती इतनी लंबी होनी चाहिए कि 9 दिन तक
जल सके. लौ कम से कम 4 अंगुल ऊंची होनी चाहिए.


अखंड ज्योति के लिए मिट्‌टी या पीतल का दीपक इस्तेमाल करें.



घी के अखंड ज्योति के दीपक को मां दुर्गा की तस्वीर के
के दाईं ओर रखना चाहिए.


नवरात्रि के अंतिम दिन अखंड ज्योति को स्वयं न बुझाएं.
उसे स्वयं ही बुझने दें.


इस साल नवरात्रि 22 सितंबर से 1 अक्टूबर तक है.