चातुर्मास 6 जुलाई को देवशयनी एकादशी से शुरू
हो रहा है.


चातुर्मास में चार महीने होते हैं सावन, भाद्रपद, अश्विन
और कार्तिक, सभी माह के अपने नियम हैं.


चातुर्मास जप-साधना के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, इस दौरान
खान पान का विशेष ख्याल रखना चाहिए तभी ये फलित होते हैं.


चातुर्मास के पहले माह सावन में दूध, कढ़ी, हरी पत्तिदार
सब्जिया नहीं खानी चाहिए.


इस दौरान बारिश अधिक होती है, वातावरण में कीटाणु होते हैं
जो इन पदार्थों में आ जाते हैं और इनके सेवन से सेहत को हानि होती है.


भाद्रपद माह में दही, नारियल का तेल, गुड़, कच्चा मास, नहीं
खाना चाहिए.


अश्विन माह में लहसुन-प्याज नहीं खाएं, इस दौरान नवरात्रि और
पितृ पक्ष रहते हैं.


वहीं कार्तिक में बैंगन, जीरा, राई, तामसिक भोजन, मसूर दाल
का सेवन नहीं करें. इससे दोष लगता है साथ ही सेहत खराब होती है.