श्रीराम ऐसे देवता हैं जिन्हें हिंदू ही नहीं बल्कि मुस्लिम
कवियों ने भी अपनी नज्म में राम का कई बार जिक्र किया है.


मशहूर शायर अल्लामा इकबाल भी उन्हीं में से एक है.
इन्होंने राम का बखान करते हुए एक नज्म लिखी है.


वो पक्ति है - है राम के वजूद पे हिन्दोस्ताँ को नाज़
अहल-ए-नज़र समझते हैं इस को इमाम-ए-हिंद


इसका अर्थ है - राम के वजूद पे हमें नाज है और हम उन्हें
देश को दिशा देने वाला नेतृत्वकर्ता समझते हैं.


अल्लामा के नजरिए से देखें तो राम ऐसे नेतृत्वकर्ता हैं
जिन्होंने लोगों को सही मार्ग दिखाए.


राम के व्यक्तिव का बखान करते हुए कहा कि राम
ने लोगों को अंधेरे से रोशनी को ओर ले जाने का काम किया.


‘सारे जहां से अच्छा हिन्दोस्तां’ के रचियता इकबाल ही हैं.



उनका परिवार कश्मीरी हिंदू था, जिसने 17वीं शताब्दी में
इस्लाम धर्म अपना लिया था