सिद्धार्थ की अधूरी शहनाज ! | सनसनी
ABP News Bureau | 04 Sep 2021 06:14 AM (IST)
ख़ुद नहीं हूं और कोई है मेरे अंदर
जो तुम को तरसता है, अब भी आ जाओ
सिद्धार्थ की चिता जब धूं-धू कर जल रही थी...तब वहां मौजूद उसके तमाम चाहने वाले मानोे यही कर रहे थे.....एक तरफ सिद्धार्थ के परिवारवाले आंसू बहा रहे थे...तो दूसरी तरफ शहनाज रो रही थी.....रो रही थी उन बीते तमाम लम्हों पर....वक्त के उन गुजरे पन्नों पर जहां से शुरू हुई थी सिद्धार्थ और शहनाज की कहानी.