इस दुनिया में अपने और अपने परिवार के लिए तो हर कोई जीता है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी हैं जो अपना पूरा जीवन गरीब और असहाये लोगों की मदद में गुजार देते हैं. ऐसी ही एक महिला इंदौर से हैं जिनका नाम भाग्यश्री है. ये इंदौर की सामाजिक कार्यकर्ता हैं. ये महिला गंभीर बीमारियों से पीड़ित बेघर और असहाय बुजुर्गों के पुनर्वास और सड़क पर पड़े मृतकों के दाह संस्कार का काम देखती हैं. इनकी इस उदारता के चलते ये न केवल महिलाओं के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक मिसाल बन गई हैं. फिलहाल ये पुरातत्व में पीएचडी भी कर रही हैं.
किससे प्रेरित हुईं भाग्यश्री:
भाग्यश्री खरकडिया ने एक इंटरव्यू में बताया कि वो इंदौर के 'फादर टेरेसा' कहे जाने वाले अमरजीत सिंह सूदन की रचनाओं से प्रेरित हैं. भाग्यश्री उनकी मृत्यु से पहले 5 साल तक उनके साथ काम भी कर चुकी हैं. सूडान ने ऐसे असहाय और निराश्रित लोगों की सालों तक मदद की है. वहीं भाग्यश्री ने बताया कि वो लोगों के पुनर्वास और उपचार के साथ साथ उनकी मृत्यु पर अंतिम संस्कार का भी ध्यान रखती हैं.
कौन हैं भाग्यश्री की हिम्मत:
भाग्यश्री अपने पिता ब्रजमोहन लोदेतिया और पति नवीन खरखड़िया को अपनी ताकत के दो स्तंभ मानती हैं. भाग्यश्री के पति नवीन खरखड़िया रेलवे कर्मचारी हैं, फिर भी वो ना केवल अपनी पत्नी के काम में रुपयों से मदद करते हैं, बल्कि नौकरी से लौटने के बाद अन्य काम में भी मदद करते हैं. वहीं भाग्यश्री के पति का कहना है कि भाग्यश्री के इरादे उन्हें प्रेरित करते हैं, वो उनके काम में उनकी मदद करते हैं और छुट्टी वाले दिन साथ जाकर उनके काम में सहयोग भी करते हैं.
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