कभी-कभी सोशल मीडिया पर ऐसे मामले सामने आ जाते हैं, जो सिर्फ हैरान ही नहीं करते, बल्कि इंसानियत और सिस्टम पर भी सवाल खड़े कर देते हैं. अमेरिका से जुड़ा एक ऐसा ही मामला इन दिनों तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें एक गर्भवती महिला को लेबर पेन के दौरान ही वर्चुअल कोर्ट सुनवाई में शामिल होने के लिए मजबूर किया गया. यह घटना सुनने में जितनी अजीब लगती है, असल में उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाली है. वीडियो सामने आने के बाद लोग इसे ‘हैरान करने वाला’ और ‘डरावना’ बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे महिला के अधिकारों का उल्लंघन भी मान रहे हैं.
लेबर पेन में महिला की कोर्ट में हुई वर्चुअल पेशी
यह पूरा मामला Florida की रहने वाली Cherise Doyley से जुड़ा है, जो सितंबर 2024 में लेबर पेन के दौरान अस्पताल पहुंची थीं. रिपोर्ट के मुताबिक, वह करीब 12 घंटे से दर्द में थीं, तभी अचानक अस्पताल स्टाफ ने उन्हें एक वर्चुअल कोर्ट सुनवाई में बैठा दिया.
वीडियो में देखा जा सकता है कि वह अस्पताल के बेड पर लेटी हुई हैं और सामने स्क्रीन पर जज, वकील, डॉक्टर और अस्पताल का स्टाफ मौजूद है. इस दौरान उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या सच में सामने जज बैठे हैं. बताया जा रहा है कि यह सुनवाई करीब 3 घंटे तक चली.
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क्यों उठाना पड़ा ये कदम?
दरअसल, महिला ने पहले ही डॉक्टरों को बता दिया था कि वह नॉर्मल डिलीवरी चाहती हैं और सी-सेक्शन (ऑपरेशन) से बचना चाहती हैं. लेकिन डॉक्टरों को गर्भाशय फटने का खतरा लग रहा था, इसलिए उन्होंने ऑपरेशन की सलाह दी. महिला का कहना था कि यह खतरा बहुत कम है और वह पहले नॉर्मल डिलीवरी की कोशिश करना चाहती हैं.
अस्पताल ने दाखिल की इमरजेंसी याचिका
मामला तब और गंभीर हो गया जब जज Michael Kalil ने बताया कि अस्पताल की तरफ से इमरजेंसी याचिका दायर की गई है, ताकि बच्चे की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर सी-सेक्शन कराया जा सके. सुनवाई के दौरान महिला ने यहां तक पूछ लिया कि क्या उसकी मर्जी के खिलाफ उसे ऑपरेशन के लिए मजबूर किया जाएगा.
अदालत ने क्या कहा?
इस बीच महिला ने दूसरे अस्पताल में ट्रांसफर करने की मांग भी की, लेकिन स्टाफ ने इसे मानने से इनकार कर दिया. हालांकि जज ने तुरंत ऑपरेशन का आदेश नहीं दिया, लेकिन यह जरूर कहा कि इमरजेंसी की स्थिति में डॉक्टर बिना अनुमति के भी सर्जरी कर सकते हैं.
आखिर करना पड़ा ऑपरेशन
बाद में डॉक्टरों के अनुसार बच्चे की धड़कन अचानक कम हो गई, जिसके बाद महिला को तुरंत ऑपरेशन थिएटर ले जाया गया और सी-सेक्शन के जरिए डिलीवरी कराई गई. अगले दिन फिर से महिला को कोर्ट में पेश किया गया, जहां उसने बताया कि उसे अभी तक अपनी नवजात बेटी से मिलने भी नहीं दिया गया था.
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सोशल मीडिया पर यूजर्स के बीच छिड़ी बहस
इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस शुरू हो गई है. कई लोग इसे महिला के अधिकारों का उल्लंघन बता रहे हैं और इसे ‘टॉर्चर’ तक कह रहे हैं. वहीं कुछ लोग डॉक्टरों के फैसले को बच्चे की सुरक्षा के लिहाज से सही भी ठहरा रहे हैं. फिलहाल यह मामला इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोगों के बीच बड़ा सवाल छोड़ रहा है कि आखिर मेडिकल इमरजेंसी और व्यक्तिगत अधिकारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए.
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