बीते कुछ दिनों से IIT से लेकर कई कॉलेजों तक में छात्रों के सुसाइड के मामले बढ़ गए हैं. बीते दिनों इसको लेकर कई जगह प्रदर्शन भी हुआ. इस बीच हॉस्टल में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा को लेकर गुजरात की एक यूनिवर्सिटी का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में है. यहां हॉस्टल के कमरों में खास तरह के पंखे लगाए गए हैं, जिन्हें एंटी-सुसाइड फैन कहा जा रहा है.

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वायरल वीडियो में एक व्यक्ति पंखे को नीचे की ओर खींचता नजर आता है, जिसके बाद पंखा अपनी जगह से नीचे आ जाता है. वीडियो पर लिखे संदेश के मुताबिक, 10 किलो से ज्यादा वजन पड़ने पर पंखा नीचे आ जाता है. इस व्यवस्था को छात्रों की सुरक्षा के लिए उठाया गया कदम बताया जा रहा है. 

हॉस्टल में लगाए गए खास तरह के पंखे

वायरल वीडियो में एक कमरे की छत पर लगा पंखा दिखाया गया है. इसकी बनावट सामान्य पंखों से अलग नजर आई. वीडियो में एक व्यक्ति पंखे को नीचे की ओर खींचता है, जिसके बाद पंखा छत से नीचे आ जाता है. इसके अंदर स्प्रिंग सिस्टम का इस्तेमाल होता हुआ नजर आ रहा है, इस तरह की व्यवस्था का मकसद पंखे पर ज्यादा भार पड़ने की स्थिति में जोखिम को कम करना बताया जा रहा है. 

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क्यों जरूरी हैं एंटी-सुसाइड फैन?

हॉस्टल में रहने वाले छात्र पढ़ाई, परीक्षा और निजी परेशानियों के कारण कई बार मानसिक दबाव का सामना करते हैं. ऐसे में शिक्षण संस्थानों में छात्रों की सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम करना अहम है. एंटी-सुसाइड फैन इसी दिशा में उठाया गया एक कदम माना जा रहा है. छात्रों को मानसिक परेशानी के दौरान मदद मिल सके, इसके लिए काउंसलिंग, भरोसेमंद बातचीत और समय पर सहायता की व्यवस्था भी जरूरी है.

वीडियो देखकर यूजर्स ने क्या कहा?

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. कुछ लोग हॉस्टल में छात्रों की सुरक्षा के लिए ऐसे इंतजामों को जरूरी बता रहे हैं, तो कुछ का कहना है कि केवल पंखे बदलने से समस्या का समाधान नहीं होगा. एक यूजर ने कहा कि पंखे लगाने से ज्यादा जरूरी सिस्टम को सुधारना है. वहीं, कुछ यूजर्स का कहना है कि जो व्यक्ति अपनी जान देने का फैसला कर चुका है, वह दूसरा तरीका भी अपना सकता है, ऐसे में सिर्फ एंटी-सुसाइड फैन लगाने से कुछ नहीं होगा. कुछ लोगों ने यह भी कहा कि छात्रों पर पढ़ाई का दबाव कम करने और उनकी मानसिक परेशानियों को समझने की जरूरत है. यूजर्स के मुताबिक, सुरक्षा के इंतजामों के साथ ऐसी व्यवस्था भी बनानी चाहिए, जहां छात्र बिना किसी डर के अपनी परेशानी बता सकें .

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