Artificial Intelligence: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल चैटबॉट या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं रह गया है. शिक्षा, स्वास्थ्य, वित्त और तकनीक जैसे कई क्षेत्रों में इसकी भूमिका तेजी से बढ़ रही है. अब AI कंपनी Anthropic की एक नई रिपोर्ट ने सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग और कोडिंग से जुड़े नौकरियों को लेकर नई बहस छेड़ दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, AI एजेंट्स कई रियल प्रोजेक्ट्स में इंसानी सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के बराबर परफॉर्मेंस करते दिखाई दे रहे हैं.

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कोडिंग टास्क में इंजीनियरों की बराबरी कर रहा AI

Anthropic ने अक्टूबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच Claude Code के लगभग 4 लाख सेशन का विश्लेषण किया. इस स्टडी में यह समझने की कोशिश की गई कि लोग AI के साथ किस तरह काम कर रहे हैं, कौन-कौन से काम किए जा रहे हैं और उनमें सफलता की दर कितनी है.

रिपोर्ट का सबसे चौंकाने वाला परिणाम यह रहा कि AI एजेंट्स कई कोडिंग कामों में पेशेवर सॉफ्टवेयर इंजीनियरों के जैसे ही सफलता हासिल कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि तकनीकी बैकग्राउंड न रखने वाले लोग भी AI की मदद से ऐसे प्रोग्रामिंग काम पूरे कर पा रहे हैं जिन्हें पहले केवल अनुभवी डेवलपर्स ही आसानी से कर सकते थे.

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AI कर रहा पूरा काम

रिपोर्ट के अनुसार, इंसानों और AI के बीच काम का एक नया बंटवारा उभरकर सामने आया है. ज्यादातर मामलों में लोग यह तय करते हैं कि उन्हें क्या बनाना है जबकि AI यह तय करता है कि उसे कैसे बनाना है.

यानी प्रोजेक्ट की प्लानिंग, टारगेट और दिशा तय करने का काम इंसान कर रहे हैं जबकि कोड लिखना, कमांड चलाना, बग ठीक करना और तकनीकी कामों जैसी जिम्मेदारियां AI संभाल रहा है. इससे डेवलपमेंट प्रोसेस पहले की तुलना में काफी तेज हो रही है.

डिबगिंग में लगा समय हुआ आधा

स्टडी में यह भी सामने आया कि AI टूल्स के इस्तेमाल से सॉफ्टवेयर में आने वाली कमियों को ठीक करने में लगने वाला समय काफी कम हो गया है. Anthropic के आंकड़ों के अनुसार, डिबगिंग से जुड़े सेशनों की हिस्सेदारी लगभग 50 प्रतिशत तक घट गई.

आसान भाषा में कहें तो AI अब केवल कोड लिखने में ही नहीं बल्कि गलतियों को पहचानने और उन्हें सुधारने में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है. इससे डेवलपर्स का समय बच रहा है और प्रोजेक्ट जल्दी पूरे हो रहे हैं.

क्या कोडिंग नौकरियों पर मंडरा रहा है खतरा?

रिपोर्ट यह नहीं कहती कि AI पूरी तरह इंसानी प्रोग्रामर्स की जगह लेने वाला है. हालांकि यह जरूर संकेत देती है कि रोजमर्रा के और दोहराए जाने वाले कोडिंग कामों में AI की भूमिका लगातार बढ़ रही है.

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