Electric vs Hydrogen Car: आपको बता दें कि, क्लीन और ग्रीन मोबिलिटी के इस दौर में जब भी बिना प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों की बात होती है, तो दो ही नाम सबसे ऊपर आते हैं. इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और हाइड्रोजन कार. अक्सर लोग इन दोनों तकनीकों को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं और इन्हें एक-दूसरे का विरोधी मान बैठते हैं. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि चलने के मामले में दोनों ही कारें इलेक्ट्रिक यानी बिजली से ही चलती हैं. 

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इनमें सबसे बड़ा अंतर सिर्फ इस बात का है कि वे एनर्जी को कैसे जमा करती हैं और मोटर तक कैसे पहुंचाती हैं. आइए बहुत ही आसान शब्दों में समझते हैं कि रेंज, खर्च और परफॉर्मेंस के मामले में इन दोनों में से कौन बाजी मारता है.

इलेक्ट्रिक और हाइड्रोजन कार में अंतर 

इलेक्ट्रिक कार को आप अपने मोबाइल की तरह सीधे किसी चार्जिंग स्टेशन या घर के प्लग से चार्ज करते हैं. बिजली कार के भारी-भरकम लिथियम-आयन बैटरी पैक में जमा होती है और सीधे मोटर को चलाती है. यह प्रोसेस बहुत सीधा और असरदार है. जबकि हाइड्रोजन कार का सिस्टम थोड़ा अलग होता है. 

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इस गाड़ी के अंदर एक 'फ्यूल सेल' लगा होता है. कार के टैंक में भरी हाइड्रोजन गैस जब हवा की ऑक्सीजन के साथ इस सेल में रिएक्शन करती है, तो कार के अंदर ही बिजली पैदा होती है. इस बिजली से गाड़ी चलती है और साइलेंसर से धुएं की जगह सिर्फ पानी की बूंदें और भाप बाहर निकलती है.

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कौन है ज्यादा किफायती?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एफिशिएंसी यानी कार्यक्षमता के मामले में इलेक्ट्रिक कारें बहुत आगे हैं. ग्रिड से लेकर पहियों तक पहुंचने में ईवी की कार्यक्षमता 70% से ज्यादा होती है, यानी बिजली की बर्बादी बहुत कम होती है. इस वजह से ईवी को प्रति किलोमीटर चलाना बेहद सस्ता पड़ता है. 

इसके विपरीत, हाइड्रोजन को पहले किसी फैक्ट्री में बनाना, कंप्रेस करना, ट्रांसपोर्ट करना और फिर कार के अंदर दोबारा बिजली में बदलने की पूरी प्रक्रिया में बहुत सारी ऊर्जा बर्बाद हो जाती है. इस वजह से हाइड्रोजन कार की कुल कार्यक्षमता सिर्फ 20% से 30% ही रह जाती है, जिससे यह ईवी के मुकाबले काफी खर्चीली साबित होती है.

कौन है रेंज के मामले में बेहतर 

भले ही खर्च के मामले में ईवी आगे हो, लेकिन जब बात टाइमिंग और रेंज की आती है तो हाइड्रोजन कार एकतरफा जीत जाती है. एक इलेक्ट्रिक कार को फास्ट चार्जर से भी चार्ज होने में कम से कम 30 से 45 मिनट का समय लगता है. वहीं, हाइड्रोजन कार में ईंधन भरना उतना ही आसान है जितना पेट्रोल या डीजल भरवाना. 

सिर्फ 5 मिनट में इसका टैंक फुल हो जाता है और यह एक बार में 500 से 650 किलोमीटर तक की लंबी रेंज आसानी से दे देती है. हालांकि, मार्केट की बात करें तो ईवी का दबदबा बहुत ज्यादा है, जबकि हाइड्रोजन कारों के लिए अभी इंफ्रास्ट्रक्चर (पंप्स) न के बराबर है.x

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