Cyber Crime: पिछले कुछ सालों से साइबर क्राइम के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है. साइबर क्राइम के कारण लोगों को हर साल भारी आर्थिक नुकसान और मानसिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है. इसे देखते हुए देश में सरकार ने साइबर क्राइम के खिलाफ डिजिटल स्ट्राइक की तैयारी शुरू कर दी है. कुछ समय पहले ही गृह मंत्री अमित शाह ने साइबर फ्रॉड को नेशनल सिक्योरिटी का मामला बताते हुए कहा था कि डेटा चोरी और साइबर ठगी राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डाल रही है. इससे निपटने के लिए गृह मंत्रालय के अंडर आने वाला Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) रणनीति तैयार कर रहा है. आइए जानते हैं कि I4C साइबर क्राइम के मामलों के खिलाफ कैसे काम करता है.

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2018 में हुई थी I4C की शुरुआत

साइबर क्राइम से लड़ने के लिए I4C एक नोडल एजेंसी है और इसके प्लेटफॉर्म से देशभर की एजेंसियों को इंटीग्रेट किया गया है. यह एजेंसी अलग-अलग स्टेकहोल्डर्स के बीच कॉर्डिनेशन बनाए रखती है, जिससे साइबर अपराधों की जांच में मदद मिलती है. इसकी शुरुआत 2018 में हुई थी और तब से यह साइबर क्राइम से निपटने और देश की अलग-अलग एजेंसियों में कॉर्डिनेशन के काम में लगी हुई है.

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कैसे काम करता है I4C?

जैसे ही कोई नागरिक हेल्पलाइन नंबर या सरकारी पोर्टल पर साइबर ठगी की शिकायत दर्ज करता है, यह मामला I4C के तहत आने वाले सिटिजन फाइनेंशियल साइबर फ्रॉड रिपोर्टिंग एंड मैनेजमेंट सिस्टम के पास चला जाता है. यह सिस्टम संबंधित इलाके की पुलिस को बैंक और दूसरे फाइनेंशियल इंटरमीडियरीज से कनेक्ट कर देता है. इससे पुलिस को ठगी के पैसे को रियल-टाइम में फ्रीज करने में मदद मिलती है. इस साल जनवरी तक यह सिस्टम 8,000 करोड़ रुपये से ज्यादा फ्रॉडस्टर की जेब में जाने से बचा चुका था. इस पूरे काम के लिए SOP बनाई गई है, जिसके तहत सभी राज्यों की पुलिस, एजेंसियां, बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थान काम करते हैं.

सिम कार्ड भी किए जा रहे ब्लॉक

शिकायतों पर कार्रवाई करने के साथ-साथ सरकार साइबर फ्रॉड में इस्तेमाल होने वाले सिम कार्ड भी ब्लॉक कर रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, गृह मंत्रालय 12 लाख सिम कार्ड कैंसिल करवा चुका है, जबकि लगभग 3 लाख मोबाइल को भी ब्लॉक किया जा चुका है.

सिम बाइंडिंग को भी लागू करने की तैयारी

मैसेजिंग ऐप्स के जरिए होने वाले साइबर क्राइम पर रोक लगाने के लिए सिम बाइंडिंग को अनिवार्य किया गया है. सरकार ने कुछ महीने पहले व्हाट्सऐप समेत सभी मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स को सिम बाइंडिंग लागू करने का आदेश दिया था. हाल ही में इसकी डेडलाइन को बढ़ाकर इस साल के अंत तक कर दिया गया है. सरकार का मानना है कि इसके लागू होने से साइबर अपराध के मामलों में कमी आएगी.

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