उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के लिए हर साल भारी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. जिससे एक तरफ राज्य की अर्थव्यवस्था को रफ्तार मिलती है, वहीं दूसरी तरफ ईंधन, गैस और रसद की मांग अचानक कई गुना बढ़ जाती है. इस बार ईरान युद्ध की वजह से गैस की कमी को देखते हुए सरकार ने यात्रा शुरू होने से पहले ही मोर्चा संभाल लिया है.

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खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग ने व्यावसायिक एलपीजी गैस की बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार से अतिरिक्त की मांग की है. मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन के निर्देश पर पूरी कार्य योजना तैयार है और भारत सरकार को भेजे जाने वाले प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है.

तेल कंपनियों के साथ बैठक

बुधवार को खाद्य आपूर्ति सचिव आनंद स्वरूप की अध्यक्षता में इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक हुई, जिसमें यात्रा सीजन में कितने सिलेंडर चाहिए होंगे, भंडारण की क्या स्थिति है, पहाड़ी रास्तों पर आपूर्ति कैसे पहुँचेगी और अगर किसी जगह अचानक माँग बढ़ी तो उसे कैसे पूरा किया जाएगा इन सब पहलुओं पर विस्तार से चर्चा हुई.

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सचिव ने बैठक कहा कि चारधाम यात्रा के दौरान होटल, धर्मशाला, ढाबे और रेस्टोरेंट में गैस की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बहुत ज्यादा हो जाती है. ऐसे में आपूर्ति तंत्र में थोड़ी भी चूक का असर सीधे यात्रियों पर पड़ता है. उन्होंने तेल कंपनियों को निर्देश दिए कि अग्रिम योजना के तहत पर्याप्त स्टॉक और लॉजिस्टिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए. 

साढ़े नौ लाख से ज्यादा सिलेंडरों की जरूरत

विभाग ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026-27 में अप्रैल से नवंबर तक की अवधि के दौरान प्रदेश में पंजीकृत करीब 14,901 होटल, रेस्टोरेंट, गेस्ट हाउस और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को मिलाकर लगभग 9,67,950 व्यावसायिक एलपीजी सिलेंडरों की जरूरत पड़ेगी. इस बीच राहत की बात ये है कि पिछले दो-तीन दिनों में ही आपूर्ति में बड़ा सुधार आया है. 

सचिव ने कहा कि सिर्फ आपूर्ति बढ़ाना काफी नहीं है अगर बाजार में कालाबाजारी और ओवरचार्जिंग हो रही हो इसीलिए विभाग ने एक समानांतर मोर्चा भी खोल रखा है. 31 मार्च 2026 तक के आँकड़े बताते हैं कि विभाग ने कितनी सक्रियता दिखाई है. राज्य के विभिन्न जनपदों में 5,389 निरीक्षण किए गए. 87 जगहों पर छापेमारी हुई. 16 एफआईआर दर्ज की गईं और 7 लोगों को गिरफ्तार किया गया. 

डीजल-पेट्रोल पर भी नजर

बैठक में सिर्फ गैस की बात नहीं हुई. सचिव स्वरूप ने यह भी बताया कि डीजल और पेट्रोल की आपूर्ति पर भी लगातार नजर रखी जा रही है. यात्रा के दौरान सड़कों पर वाहनों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है और ऐसे में ईंधन की कमी परिवहन और आपातकालीन सेवाओं को भी प्रभावित कर सकती है. इससे बचने के लिए तेल कंपनियों के साथ नियमित समन्वय बनाए रखा जा रहा है.

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