उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सियासी रंग चढ़ने लगा है लेकिन, पश्चिमी यूपी में भारतीय जनता पार्टी की चुनौतियां बढ़ती नजर आ रही है. दिलचस्प बात ये है कि ये मुश्किलें विरोधी दलों से नहीं बल्कि अपनी पार्टी के नेताओं के बीच छिड़ी अदावत से बढ़ गई हैं. मुजफ्फरनगर से पूर्व सांसद और दो बार कैबिनेट मंत्री रहे संजीव बालियान पार्टी के लिए सिरदर्द बनते दिख रहे हैं. 

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संजीव बालियान पश्चिमी यूपी में बीजेपी के बड़े हिन्दुत्व के चेहरे और जाट नेता के तौर पर जाने जाते हैं लेकिन, 2024 के चुनाव में हार के बाद उनका आक्रामक रूख देखने को मिल रहा है. रविवार को मेरठ के सरधना में महाराजा सूरजमल की प्रतिमा अनावरण समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने बिना किसी का नाम लिए अपनी ही पार्टी पर जमकर भड़ास निकाली.

संजीव बालियान के इस बयान से बढ़ी चुनौती

पूर्व केंद्रीय मंत्री ने इस मंच से कहा कि वो अपनी हार का बदला सूद के साथ वापस करेंगे. उन्होंने कहा कि कई बार 'सामाजिक और राजनीतिक जीवन में अपमान सहना पड़ता है लेकिन वो इसे सूद समेत वापस लौटाएंगे.' उन्होंने कहा कि 'चुनाव में हार-जीत से दुख नहीं होता लेकिन दुख उस अपमान से होता है जो साजिश के तहत किया गया हो. मेरा दो बार अपमान हुआ हैं मैं इसे भूलने वाला नहीं हूं.' 

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संजीव बालियान ने भले ही किसी का नाम नहीं लिया लेकिन उनका इशारा अपनी पार्टी के नेता संगीत सोम की ओर था. बड़ी बात ये है कि संजीव बालियान ने जब ये कहा तो उस समय मंच पर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान और बीजेपी छोड़ने वाले हनुमान बेनीवाल भी बैठे थे.

बालियान की नाराजगी बीजेपी पर पड़ेगी भारी 

सियासी जानकारों का मानना है कि संजीव बालियान का रवैया पश्चिमी उत्तर प्रदेश किले में भारतीय जनता पार्टी के लिए खतरा बन सकता है. वो अपनी चुनावी हार को भूले नहीं है और अब संगीत सोम के साथ अपना हिसाब बराबर करने के मूड में है. बालियान ने इस दौरान ये भी कहा कि उनके कार्यक्रम में बाधाएं डालने की कोशिश की गई और ये किसने की सब जानते हैं. 

दरअसल पश्चिमी यूपी में बालियान और संगीत सोम बीजेपी के प्रमुख चेहरे माने जाते हैं. सरधना विधानसभा मेरठ का हिस्सा है लेकिन ये मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट के अंतर्गत आती है. संजीव बालियान साल 2014 और 2019 में दो बार यहां से चुनाव जीतकर सांसद बने लेकिन, 2024 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. इससे पहले सरधना सीट से संगीत सोम भी दो बार विधायक रह चुके हैं और 2022 में वो चुनाव हार गए. 

पश्चिमी यूपी में जाट बनाम ठाकुर की जंग

संगीत सोम ने भी अपनी हार के लिए संजीव बालियान को ज़िम्मेदार बताया और कहा कि जाटों का वोट उन्हें नहीं मिला. इसी तरह 2024 में जब बालियान चुनाव हारे तो उन्होंने संगीत सोम पर इसका ठीकरा फोड़ दिया. सूत्रों के मुताबिक संगीत सोम का पलड़ा इन दिनों भारी है क्योंकि राजपूत होने के नाते वो सीएम योगी आदित्यनाथ के ज्यादा करीबी माने जाते हैं. 

राजनीतिक जानकारों की मानें तो बालियान की ये नाराजगी भारती जनता पार्टी का सिरदर्द बढ़ा सकती है जिससे पार्टी को पश्चिमी यूपी में खासा डेंट लग सकता है. बालियान जिस तरह भगवंत मान और हनुमान बेनीवाल के साथ मंच साझा करते हुए दिखाई दिए उस पर भी बीजेपी हाईकमान की पूरी नज़र है. ऐसे में आने वाले समय में जाट बनाम राजपूत की लड़ाई और तेज हो सकती है. जिसका असर 2027 के चुनाव में दिखाई दे सकता है. 

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द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के एक नेता ने नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर कहा कि बालियान की नाराजगी नुकसान पहुंचा सकती है. मान के साथ मंच साझा करना उचित विचार नहीं था. हमें यह तरीका पसंद नहीं आया कि कैसे मान ने उसी मंच से मोदी पर हमला किया और बालियान मुस्कुराते हुए दिखे. हमने इस कार्यक्रम का एक वीडियो BJP के केंद्रीय नेतृत्व को भेजा है.