उत्तर प्रदेश भारतीय जनता पार्टी में नई टीम को लेकर चर्चाओं के बीच पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं का इंतजार बढ़ता जा रहा है. गुरुवार को प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह से मिलने के लिए लखनऊ में पार्टी नेताओं की खासा भीड़ रही. सबकी जिज्ञासा थी कि सूची कब जारी होगी लेकिन पार्टी के सूत्रों के मुताबिक कार्यकर्ताओं को सब्र रखने के निर्देश दिए गए हैं.

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पार्टी पदाधिकारियों की मानें तो प्रदेश संगठन से सूची दिल्ली में केंद्रीय नेतृत्व को सौंप दी गई है, अब वहां से हरी झंडी मिलते ही घोषणा कर दी जाएगी. इसमें समय दो दिन से एक सप्ताह से अधिक का समय भी लग सकता है. सबसे ज्यादा बेचैनी उन नेताओं में जो निगम, आयोग, बोर्ड व प्राधिकरण में उम्मीद लगाए बैठे हैं.

दोनों नेताओं ने सीएम योगी से की थी मुलाकात 

दिल्ली से लौटने के बाद प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने बुधवार को सीएम योगी से भी मुलाक़ात की थी. जिसके बाद उम्मीद बंध रही थी कि जल्द घोषणा कर दी जाएगी. लेकिन गुरूवार को सब्र की बात ने पार्टी नेताओं की बेचैनी घोषणा होने तक बढ़ा दी है.

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विधानसभा चुनाव समय पूर्व की आहट 

प्रदेश में विधानसभा चुनाव अगले साल मार्च से पहले ही होने हैं , लेकिन कुछ जगह से चुनाव पहले कराए जाने की भी चर्चा इन दिनों जोर पकड रही है. ऐसे में प्रदेश की टीम नहीं बन पाना बड़ा सवाल है. क्षेत्रीय स्तर पर काशी क्षेत्र में पीएम मोदी व् गृह मंत्री अमित शाह की पसंद के नेताओं को तरजीह दी जाएगी. इसके अलावा छह क्षेत्रीय अध्यक्षों के नामों को लेकर भी सहमती नहीं बन पा रही है. सबसे बड़ी दिक्कत जातीय समीकरणों को साधने में है.क्यूंकि सीधा मुकाबला सपा के पीडीए से होगा.

यहां बता दें कि प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नियुक्ति के छह महीने हो चुके हैं और संगठन अभी भी नहीं बन पाया है. वहीं पार्टी ने इस बार दो नियम बनाए हैं -एमएलसी बन चुके पदाधिकारियों को बदला जाएगा दूसरे जिसने संगठन में 10 साल पूरे कर लिए हों.

इससे पहले राष्ट्रीय महामंत्री विनोद तावड़े समेत संघ और पार्टी पदाधिकारियों की कई दौर की बैठकें बीते माह हो चुकी हैं. मंत्रिमंडल विस्तार के बॉस अभी भी संगठन की घोषणा बाकी है. माना जा रहा है सबसे बड़ी चुनौती क्षेत्रीय इकाइयों में जाति प्रतिनिधित्व को लेकर है.

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