उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर दलीय तैयारियां अब जोर पकड़ने लगी है. समाजवादी पार्टी हो या भारतीय जनता पार्टी अपने बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओ को चार्ज करने में जुटी हैं. मकसद साफ है कि जब बूथ मजबूत होगा तो चुनाव भी मजबूती से लड़ा जाएगा.
चुनावी तैयारियों को धार देने के लिए भारतीय जनता पार्टी ने बूथ सशक्तिकरण अभियान शुरू कर चुनाव को धार देने की तैयारी में हैं. इस अभियान की कमान खुद प्रदेश संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह ने संभाल रखी है.
संगठन मंत्री संयोजकों से करेंगे संवाद
कार्यक्रम के तहत महामंत्री संगठन खुद जिलों में जाएंगे शक्ति केंद्र के संयोजकों से संवाद करेंगे. इतना ही नहीं इस बैठक के दौरान बूथ स्तरीय कार्यकर्ताओ के अलावा वो कार्यकर्ता जो पार्टी से पुराने जुड़े रहे हैं उनसे भी जुड़कर पार्टी की नीतियों से परिचित कराने और अन्य को जोड़ने की अपील करेंगे. इसमें पिछड़ा एससी और एसटी कार्यकर्ताओ से भी मीटिंग की जाएगी.
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जानकारी के अनुसार आगामी चुनाव को लेकर बीजेपी का 8 प्लान तैयार है. बीती 11 जुलाई को हुई बैठक के बाद फैसला लिया गया है, जिसमें 22 जुलाई तक सभी विधानसभा क्षेत्रों में बूथ सम्मेलन का आयोजन किया जाएगा. इसमे बूथ मैपिंग ,पुराने कार्यकर्ताओ से संपर्क अभियान पर जोर दिया जा रहा है. पार्टी और संगठन के संदेश को कार्यकर्ता तक पहुंचाना इसका उद्देश्य होगा.
सेक्टर संयोजकों का सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें सेक्टर में पदाधिकारी बैठक करेंगे. बूथ पर महिला पदाधिकारियों और वोटरों को जोड़ने का अभियान तेज होगा. युवाओं को पार्टी की नीतियों से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा और पिछड़े और दलित बस्तियों में भी अभियान चलेगा. बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि पार्टी हमेशा जनता के बीच रहती है. बूथ के संयोजकों के साथ कार्यक्रम करके संदेश को जन जन तक पहुंचाने का काम करती है.
सपा पीडीए के जरिए जन-जन तक पहुंच रही
समाजवादी पार्टी भी चुनावी अभियान को धार दे रही है और पीडीए के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के लिए जिलावार बैठक कर रहे हैं. इन बैठकों के माध्यम से बूथ स्तर युवा बूथ स्तर पर बूथ अध्यक्ष के साथ बीएलए को भी मजबूत कर रही. बूथ स्तर पर चौपाल को धार देने की अपील की जा रही है. चौपाल में समसामयिक मुद्दों पर जोर देने की अपील की जा रही है.
बूथ अध्यक्ष से अखिलेश यादव सीधे संपर्क रह रहे हैं. बताया जा रहा है कि इस बार जिताऊ प्रत्याशी पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है. इतना ही नहीं जातिगत आंकड़ों को ध्यान में रखा जा रहा है और इसके साथ ही सीट बंटवारे को लेकर पिछली गलतियों के सुधार पर भी मंथन जारी है एक सूचना और भी है कि 84 सीट सुरक्षित हैं, लेकिन इस बार जहां से सामान्य सीट है वहां से भी दलित चेहरे पर फोकस किया जा रहा है.
संविधान के संदेश को जन जन पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है. इसके पीछे 2024 में संविधान का नारा काम किया था. इसलिए इस पर जोर है. इसके अलावा अपने पांच साल बनाम बीजेपी के दस साल भी गिनाए जा रहे हैं और इन सबके लिए पम्पलेट भी तैयार हो रहे हैं.सपा प्रवक्ता उदयवीर सिंह ने बताया कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष इस पर नजर रख रहे हैं, बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं से लगातार टच में हैं.
सपा-बीजेपी में कांटे की टक्कर
राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो इस बार के बूथ मैनेजमेंट में खास तौर पर सपा और भाजपा की कड़ी टक्कर है. बीजेपी पहले से बूथ मैनेजमेंट में आगे थी लेकिन इस बार सपा ने भी खुद को मजबूत किया है और इसका उदाहरण एसआईआर के दौरान दिखा था. जहां सपा के कार्यकर्ता आगे दिखाई दिए थे. अब इस बार लोगों से आत्मीय टच भी रखा जा रहा है.
राजनीतिक विश्लेषक विजय उपाध्याय ने कहा कि यूपी में सपा और बीजेपी के बीच राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है. इस बार सपा ने एसआईआर में अच्छा काम किया, लेकिन इसके इतर बीजेपी पीछे रही. इस बार बूथ के साथ लोगों से जुड़ भी रहे हैं.
यूपी के चुनाव पर चुनावी चाणक्य अमित शाह की भी नजर है और ये कहा भी जा रहा है कि वो इसका फीड बैक भी ले रहे हैं. सपा और भाजपा की इन तैयारियों को जनता कैसे लेती है ये आने वाला वक्त बताएगा. लेकिन चुनावी सरगर्मी बढ़ती नजर आ रही है.
