उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अपनी राजनीतिक रणनीति को नया स्वरूप देने में जुट गई है. लंबे समय से ‘पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक’ यानी PDA की राजनीति करने वाली सपा अब उसी PDA को नया अर्थ देते हुए ‘प्लान, डेवलप एंड असेंट’ के रूप में पेश कर रही है. इसके जरिए पार्टी पारंपरिक वोट बैंक की राजनीति से आगे बढ़कर बुद्धिजीवियों, युवाओं, पेशेवरों और कारोबारी वर्ग तक अपनी पहुंच बनाने की कोशिश कर रही है.

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सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के नेतृत्व में शुरू की गई ‘विजन इंडिया- प्लान, डेवलप एंड असेंट’ पहल के तहत प्रदेशभर में संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं.14 जून को आगरा में होने वाले कार्यक्रम में छोटे व्यापारियों और कारोबारी वर्ग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी.इससे पहले गाजियाबाद में गन्ना किसानों के मुद्दों पर संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जा चुका है.

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भविष्य की नीति का खाका तैयार होगा 

पार्टी का दावा है कि इन कार्यक्रमों का उद्देश्य केवल राजनीतिक भाषण देना नहीं, बल्कि विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों, उद्यमियों, युवाओं और हितधारकों से सुझाव लेकर भविष्य की नीतियों का खाका तैयार करना है.इसी मुताबिक़ जून से अगस्त तक प्रदेश के अलग-अलग शहरों में पेपर लीक, युवाओं की चुनौतियां, आलू किसानों की समस्याएं, चमड़ा उद्योग और व्यापार जैसे विषयों पर चर्चा होगी.

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इस पूरी योजना के पीछे मुख्य भूमिका निभा रहा है उत्तर प्रदेश के पूर्व चीफ सेक्रेटरी , रिटायर्ड आईएएस आलोक रंजन ने कहा के हमारी कोशिश है कि हम हर वर्ग के बीच में पहुंच पाए और अपना विजन उनको बता पाएं.आलोक रंजन का कहना है कि चाहे युवा या  व्यापारी हो या प्रोफेसर हो क्या अन्य शिक्षित समाज के लोग हैं.हम सभी वर्ग में उनके लिए क्या कर सकते हैं और उनकी हमसे क्या उम्मीद है इस बैठक के माध्यम से यह जानने और समझाने का प्रयास कर रहे हैं.

सपा प्रवक्ता दीपक रंजन का कहना है कि यह पहल लोगों से सीधे संवाद और फीडबैक लेने का माध्यम है.उनके मुताबिक समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर किन क्षेत्रों में क्या बदलाव होने चाहिए, इसके लिए व्यापारी, नौजवान, महिलाएं और विभिन्न वर्गों के लोगों से सुझाव लिए जा रहे हैं.उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव लगातार समाज के विभिन्न वर्गों के बीच जाकर उनकी राय जानने का काम कर रहे हैं.

बीजेपी का सपा पर गुंडागर्दी को बढ़ावा देने का आरोप 

हालांकि बीजेपी ने सपा की इस पहल को राजनीतिक दिखावा बताया है.बीजेपी प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने कहा कि समाजवादी पार्टी चाहे जितने नए नारे दे दे, लेकिन उसका मूल चरित्र नहीं बदल सकता.उन्होंने आरोप लगाया कि सपा की पहचान गुंडागर्दी, हल्लाबोल और अपराधियों को संरक्षण देने वाली पार्टी के रूप में रही है और चुनाव नजदीक आते ही उसका वही चेहरा फिर सामने आ जाएगा.

दरअसल, सपा इस अभियान के जरिए अपनी उस छवि को बदलने की कोशिश कर रही है जिसे बीजेपी लगातार ‘गुंडों की पार्टी’ कहकर प्रचारित करती रही है.पार्टी नेतृत्व का मानना है कि केवल विरोध की राजनीति करने के बजाय विकास, रोजगार, उद्योग और युवाओं के मुद्दों पर वैकल्पिक विजन पेश करके वह नए सामाजिक वर्गों को अपने साथ जोड़ सकती है.

अब देखना होगा कि ‘प्लान, डेवलप एंड असेंट’ वाला नया PDA सपा को पारंपरिक वोट बैंक से आगे बढ़ाकर नए मतदाताओं तक पहुंचाने में कितना सफल होता है और 2027 के चुनावी रण में यह रणनीति कितना असर दिखाती है.

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