उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने अवैध शराब के कारोबार पर सख्ती दिखाई है. गाजियाबाद के नाइट क्लबों और बार में बिना लाइसेंस शराब परोसने और दूसरे राज्यों की शराब बेचने के मामले में जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार को निलंबित कर दिया गया है. आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल के निर्देश पर शासन ने यह कार्रवाई की है. निलंबन अवधि में संजय कुमार को प्रयागराज से संबद्ध किया गया है.

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शासन ने पूरे मामले की विभागीय जांच के आदेश भी दिए हैं. इसके लिए उप आबकारी आयुक्त, मेरठ को जांच अधिकारी बनाया गया है. सरकार ने साफ किया है कि आबकारी नियमों के उल्लंघन और विभागीय जिम्मेदारी में लापरवाही पर जवाबदेही तय की जाएगी.

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औचक निरीक्षण में सामने आईं अनियमितताएं

गाजियाबाद के नाइट क्लबों, बार और रेस्टोरेंट में अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही थीं. इसके बाद अपर जिलाधिकारी (नगर) की अध्यक्षता में संयुक्त प्रशासनिक टीम बनाई गई. टीम में नगर मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर और तहसीलदार सदर शामिल थे. टीम ने कई प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया. इस दौरान शराब बिक्री से जुड़ी गंभीर गड़बड़ियां सामने आईं.

बिना लाइसेंस परोसी जा रही थी शराब

जांच में कुछ प्रतिष्ठानों पर बिना ओकेजनल बार लाइसेंस शराब परोसने के मामले सामने आए. इसके अलावा दूसरे राज्यों में बिक्री के लिए अनुमन्य मदिरा को गाजियाबाद में बेचने की अनियमितता भी उजागर हुई. आबकारी नियमों के तहत इस तरह की बिक्री की अनुमति नहीं है. इन मामलों को विभागीय स्तर पर गंभीरता से लिया गया.

जिला आबकारी अधिकारी को माना गया जिम्मेदार

आबकारी मंत्री नितिन अग्रवाल ने कहा कि अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने में विफल रहने के कारण जिला आबकारी अधिकारी को प्रथमदृष्टया जिम्मेदार माना गया है. इसी आधार पर संजय कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया. उनके खिलाफ अनुशासनिक और विभागीय कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है.

मेरठ के उप आबकारी आयुक्त करेंगे जांच

शासन ने मामले की विस्तृत जांच के लिए उप आबकारी आयुक्त, मेरठ को जांच अधिकारी नामित किया है. कार्रवाई उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली के तहत की गई है. जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी. सरकार का कहना है कि प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने और आबकारी व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे.

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