चारधाम यात्रा का काउंटडाउन शुरू हो चुका है और देहरादून की सड़कों पर अभी से वाहनों का दबाव बढ़ने लगा है. ऐसे में परिवहन विभाग ने एक बड़ा फैसला लिया है. मुख्य मार्गों पर मनमाने ढंग से दौड़ रहे ई-रिक्शा और ई-ऑटो पर सख्त कार्रवाई होगी. आरटीओ (प्रशासन) संदीप सैनी ने यात्रा सीजन से पहले विशेष अभियान चलाने के संकेत दे दिए हैं.

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देहरादून में इस वक्त करीब चार हजार ई-रिक्शा पंजीकृत हैं. इनके लिए अलग-अलग आंतरिक रूट तय किए गए हैं. मकसद यह था कि ये छोटी गलियों और मोहल्लों में चलें और मुख्य सड़कें बड़े वाहनों के लिए खुली रहें, लेकिन जमीनी हकीकत बिल्कुल उलट है. बड़ी तादाद में ई-रिक्शा चालक तय रूट को ताक पर रखकर मुख्य मार्गों पर धड़ल्ले से चल रहे हैं. आईएसबीटी से घंटाघर, घंटाघर से सर्वे चौक और सर्वे चौक से क्रॉसिंग तक, यह पूरा खंड रोजाना जाम की चपेट में रहता है और इसकी बड़ी वजह यही बेलगाम ई-रिक्शा हैं.

चारधाम यात्रा सीजन में बढ़ेगी मुश्किल

बात सिर्फ रोजमर्रा के जाम की नहीं है. यही मार्ग मसूरी, सहस्त्रधारा और लच्छीवाला जाने वाले पर्यटकों के लिए भी मुख्य रास्ता है. चारधाम यात्रा शुरू होते ही बाहर से आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की गाड़ियां इन्हीं सड़कों से गुजरेंगी. अगर अभी से व्यवस्था नहीं सुधरी तो यात्रा सीजन में हालात और बिगड़ सकते हैं. परिवहन विभाग यह बात पहले से जानता है, इसीलिए इस बार यात्रा शुरू होने का इंतजार किए बिना पहले ही मोर्चा संभालने की तैयारी है.

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शहर में पहले भी कई बार हुई कार्रवाई

यह पहली बार नहीं है जब विभाग ने ई-रिक्शा के खिलाफ कमर कसी हो. इससे पहले भी मानक संचालन प्रक्रिया जारी की गई, चालान काटे गए, वाहन जब्त किए गए. लेकिन कुछ दिनों बाद सब वापस पुराने ढर्रे पर आ गया. इस बार देखना होगा कि विभाग का यह अभियान महज कागजी कार्रवाई बनकर रह जाता है या सच में जमीन पर दिखता है.

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प्रशासन के निशाने पर ई-ऑटो

सिर्फ ई-रिक्शा ही नहीं, शहर में सैकड़ों ई-ऑटो भी बिना किसी तय रूट के मुख्य सड़कों पर चल रहे हैं. रेलवे स्टेशन, प्रिंस चौक, तहसील चौक, दर्शनलाल चौक और लैंसडाउन चौक आदि ये सभी व्यस्त इलाके ई-ऑटो की भीड़ से परेशान हैं. इनके लिए न तो दूरी तय है और न रूट. जिसका नतीजा यह है कि ये जहां मन आए, वहां घूमते रहते हैं. परिवहन विभाग ने ऐसे वाहनों को भी चिह्नित कर कार्रवाई का भरोसा दिया है.

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