बिजनौर में अत्याधुनिक अवैध हथियार के वायरल वीडियो वाले मामला में बड़ा खुलासा हुआ है. उत्तर प्रदेश की एंटी‑टेररिस्म स्क्वॉड (ATS) ने इसमें एक बड़े आतंकी नेटवर्क का पर्दाफाश किया है, जिसमें साकिब उर्फ डेविल, अरबाब, विकास और लोकेश जैसे संदिग्ध शामिल थे. यह मामला 23 नवंबर 2025 का है, तब बिजनौर के नांगल सोती थाना की एक वीडियो वायरल हुई थी. यह वीडियो एक ग्रुप की वीडियो कॉल का था. इस ग्रुप में कई युवक शआमिल थे और कॉल के दौरान उनके हाथ में AK‑47 राइफल जैसे हथियार और एक हैंड ग्रेनेड भी दिखा था.
बिजनौर पुलिस ने वीडियो के सामने आने के बाद उसी दिन FIR दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी थी, लेकिन तत्कालीन थानाध्यक्ष सत्येंद्र सिंह मलिक ने मामले को रफा-दफा करने का प्रयास किया था. उन्होंने तब कहा था कि AK‑47 असली नहीं, बल्कि एक 'खिलौना' था और ग्रेनेड को परफ्यूम की बोतल बताया था. इसमें क्षेत्राधिकारी (CO) नितेश प्रताप सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठे थे, जिसके बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया था. वहीं थानाध्यक्ष सतेंद्र मलिक को सस्पेंड कर दिया गया था.
जांच में क्या सामने आया?
अब इस मामले पर प्रदेश के कानून एवं व्यवस्था के लिए अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG) अमिताभ यश ने मीडिया को पूरी जानकारी दी है. उन्होंने बताया, "प्राप्त सूचना के आधार पर एक गिरोह जो पाकिस्तानी हैंडल से निरंतर सपंर्क में था, तथा देश विरोधी गतिविधियों को संचालित कर रहा था, उसका फंडाफोड़ हुआ है. गिरोह का मुख्य सदस्य साकिब उर्फ डेविल, पुत्र शकील अहमद निवासी मेरठ, नाई का काम करता है.
साकिब का परिचय मेरठ निवासी आकिब द्वारा इंस्टाग्राम के माध्यम से पाकिस्तानी हैंडलर्स से करवाया गया था. आकिब के AK-47 के साथ कई वीडियो सोशल मीडिया के पलेटफॉर्म पर उपलब्ध है, जिसके संबंध में जांच की जा रही है."
पाकिस्तान क्यूआर कोड के जरिए मंगाते थे पैसे
ADG ने बताया कि आकिब वर्तमान में दुबई में रह रहा है. इसकी मदद से साकिब पाकिस्तानी हैंडलर्स के विभिन्न कट्टरपंथी ग्रुपों तथा अफगानिस्तान के एक नंबरों से जुड़ा था. यह गिरोह रेलवे सिग्नल बॉक्स को नष्ट करने, गैस सिलिंडर से भरे ट्रकों में आग लगाने और राजनीतिक व्यक्तियों की रेकी करने के काम में लगा था. इन अभियुक्तों द्वारा आगजनी की घटनाओं को भी अंजाम दिया जा रहा था और इनके वीडियो पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेजकर हर क्यूआर कोड के माध्यम से पैसे मंगाए जाते थे.
ADG ने अमिताभ यश ने कहा, "पाकिस्तानी हैंडलर्स ओसामा बिन लादेन, बतुल्लाह गोरी, कश्मीर मुजाहिदीन, गजवा हिंद जैसे नामों के जरिए धर्म के आधार पर लोगों भड़काने, दुकानों में आग लगाने के लिए प्रेरित करता था और अपराधिक षड्यंत्र रचता था. साकिब के गांव का रहने वाला अरबाब भी उसके साथ इस काम में जुड़ा हुआ है.
साकिब और अरबाब ने सोशल मीडिया के जरिए विकास गहलावत और लोकेश पंडित (निवासी गौतम बुद्ध नगर) को भी अपने नेटवर्क में शामिल कर लिया था. इस गिरोह ने गाजियाबाद अलीगढ़ लखनऊ शहरों में प्रतिष्ठित संस्थाओं, वाहनों, रेलवे सिग्नल बॉक्स की रेकी की थी. इसके अलावा विभिन्न पाकिस्तानी हैंडलर को वीडियो भेजे गए."
बड़ी घटना को अंजाम देने की थी तैयारी
ADG ने इस गिरोह की बड़ी योजना का भी खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि 2 अप्रैल को इस गिरोह के मुख्य सदस्य साकिब उर्फ डेविल द्वारा लखनऊ रेलवे के पास रेलवे सिग्नलथा अन्य रेलवे संपत्तियों को आगजनी कर व विस्फोट कर उसे नुकसान पहुंचाने की योजना बनाई गई थी. हालांकि, उससे पहले ही उत्तर प्रदेश की एटीएस टीम द्वारा गिरोह के सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया गया. गिरफ्तार अभियुक्तों से सात स्मार्टफोन बरामद हुए हैं, जिनमें महत्वपूर्ण साक्ष्य मिले हैं. गिरफ्तार अभियुक्तों को 5 अप्रैल को कोर्ट के समक्ष पेश किया गया और कोर्ट ने सभी को पांच दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया है.
