उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से प्रशासन की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है. नगर पालिका प्रशासन ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के नाम पर अपनी शक्ति का प्रदर्शन उन गरीबों पर किया है, जो फुटपाथ पर फल बेचकर अपने परिवार का पेट पालते हैं. ताजा मामला कोतवाली थाना क्षेत्र के अति-वीआईपी इलाके कंपनीबाग चौराहे का है, जहां एडीएम आवास के ठीक सामने नगर पालिका की जेसीबी ने एक गरीब तरबूज विक्रेता की उम्मीदों को बेरहमी से कुचल दिया.

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नगर पालिका के उच्चाधिकारियों ने शहर को अतिक्रमण मुक्त करने का निर्देश जारी किया था. इस निर्देश का पालन करने निकली टीम जब कंपनीबाग पहुंची, तो उन्हें सड़क किनारे जमीन पर तरबूज की दुकान सजाए एक गरीब दुकानदार दिखाई दिया. टीम ने बिना किसी पूर्व चेतावनी या संवेदनशीलता के सीधे जेसीबी बुलडोजर का इस्तेमाल कर दुकानदार के माल को कब्जे में लेना शुरू कर दिया.

'सामान हटाने का भी मौका नहीं दिया'

घटना का सबसे विचलित करने वाला पहलू यह रहा कि जमीन पर रखे तरबूजों को हाथों से उठाने या दुकानदार को हटाने का मौका देने के बजाय प्रशासन ने जेसीबी के पंजे से तरबूजों को उठाकर ट्रैक्टर-ट्रॉली में भरना शुरू किया. इस प्रक्रिया में आधे से ज्यादा फल मौके पर ही दबकर नष्ट हो गए. ईओ नगर पालिका अंगद गुप्ता की इस अमानवीयता और तानाशाही को तस्वीरें अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है जिसको लेकर सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा देखने को मिल रहा है.

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दुकानदार रोजी-रोटी के लिए गुहार लगाता रहा

मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अतिक्रमण की कार्यवाही खुद अधिशासी अधिकारी के देख रेख और आदेश पर हो रहा था, और गरीब दुकानदार हाथ जोड़कर अपनी रोजी-रोटी की उनसे भीख मांगता रहा, लेकिन प्रशासन के अमानवीय तंत्र को उस पर तरस नहीं आया. एडीएम आवास के ठीक सामने हुई इस अजब कार्रवाई को देखकर राहगीर भी ठिठक गए.

इस कार्रवाई ने नगर पालिका और स्थानीय प्रशासन की मंशा पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, क्या अतिक्रमण हटाने का मतलब गरीब के सामान को नष्ट करना है? क्या बड़े शोरूम और रसूखदारों द्वारा किए गए स्थायी अतिक्रमण पर भी इसी तरह जेसीबी चलती है? जमीन पर बैठकर फल बेचने वाले के साथ इस तरह का व्यवहार क्या अमानवीयता की श्रेणी में नहीं आता?

वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल

कोतवाली थाना क्षेत्र में हुई इस घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी है. स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को व्यवस्था सुधारने का हक है, लेकिन किसी गरीब की आजीविका को इस तरह रौंदना न्यायसंगत नहीं है. फिलहाल, इस कार्रवाई के बाद से फुटपाथ पर दुकान लगाने वाले छोटे व्यापारियों में दहशत का माहौल है. अब देखना यह है कि क्या जिले के उच्च अधिकारी इस अमानवीय कृत्य का संज्ञान लेकर संबंधित कर्मचारियों पर कोई कार्रवाई करते हैं या नहीं. मगर लोगों के विरोध के बाद अतिक्रमण हटवाने वाले अधिशाषी अधिकारी अंगद गुप्ता अब खुद के बचाव में उतर आए है, उन्होंने मेट के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है और न देने पर कार्यवाही का अल्टीमेटम भी दिया है.