दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर से जुड़ी 12 किलोमीटर लंबी आशारोड़ी-झाझरा ग्रीनफील्ड फोरलेन बाईपास परियोजना को तय समय पर पूरा करने के लिए जिला प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है. जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने गुरुवार (6 अगस्त) को निर्माणाधीन परियोजना का स्थलीय निरीक्षण कर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के अधिकारियों को गुणवत्ता, सुरक्षा और समयबद्ध निर्माण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. करीब 716 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना को अप्रैल 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है.
निर्माण कार्य में देरी बर्दाश्त नहीं, गुणवत्ता पर विशेष जोर
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने परियोजना के विभिन्न निर्माण स्थलों का जायजा लिया. उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति, गुणवत्ता, मशीनरी, मानव संसाधन और उपलब्ध संसाधनों की विस्तार से समीक्षा की. डीएम ने स्पष्ट कहा कि जनहित से जुड़ी इस परियोजना में किसी भी प्रकार की अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और निर्माण कार्य तय समयसीमा के भीतर पूरा होना चाहिए.
डॉ. आशीष चौहान ने एनएचएआई अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप ही किया जाए. साथ ही कार्यस्थलों पर पर्याप्त मशीनरी, संसाधन और श्रमिक उपलब्ध कराकर निर्माण की रफ्तार बढ़ाई जाए. उन्होंने परियोजना के प्रत्येक चरण की नियमित मॉनिटरिंग करने के भी निर्देश दिए.
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निर्माण स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. उन्होंने प्रभावी ट्रैफिक मैनेजमेंट, पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेतक और अन्य सुरक्षा उपाय लागू करने पर जोर दिया, ताकि निर्माण कार्य के दौरान आम लोगों और यात्रियों को किसी प्रकार की असुविधा न हो.
डीएम ने अधिकारियों से कहा कि यदि भूमि अधिग्रहण, तकनीकी या प्रशासनिक स्तर पर कोई बाधा आती है तो उसका तत्काल समाधान किया जाए, जिससे परियोजना बिना किसी रुकावट के आगे बढ़ सके. उन्होंने परियोजना की नियमित समीक्षा करने के भी निर्देश दिए.
दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर से जुड़ेगी परियोजना
यह ग्रीनफील्ड फोरलेन बाईपास झाझरा से शुरू होकर राष्ट्रीय राजमार्ग-7 के नए पांवटा साहिब–बल्लूपुर खंड को जोड़ते हुए आशारोड़ी चेक पोस्ट के पास दिल्ली-देहरादून आर्थिक कॉरिडोर से जुड़ेगी. परियोजना पूरी होने के बाद भारी और ट्रांजिट वाहनों को शहर के बाहर से निकाला जा सकेगा, जिससे देहरादून शहर में ट्रैफिक जाम में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है.
प्रशासन का कहना है कि परियोजना पूरी होने के बाद देहरादून की शहरी परिवहन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित होगी. स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों को सुरक्षित, सुगम और तेज आवागमन की सुविधा मिलेगी, जबकि शहर के भीतर भारी वाहनों का दबाव भी काफी कम हो जाएगा.
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