उत्तर प्रदेश के राज्य मंत्री नरेंद्र कश्यप ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधा. उन्होंने अखिलेश यादव को घमंडी और खुदगर्ज बताते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी लगातार अपनी राजनीतिक परिभाषाएं बदलकर अलग-अलग वर्गों को भ्रमित करने की कोशिश कर रही है. कश्यप ने दावा किया कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को बड़ा राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ेगा.
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर हुई ईडी की छापेमारी पर नरेंद्र कश्यप ने कहा कि प्रदेश की जनता इस बात से परिचित है कि समाजवादी पार्टी की सरकार के दौरान जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े कई ऐसे काम हुए, जिनका कानून और नियमों से कोई संबंध नहीं था. इस मामले में धीरे-धीरे परतें खुल रही हैं और जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं.
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'आक्रांताओं के नाम से यूनिवर्सिटी बनाकर क्या संदेश देना चाहती है सपा'
उन्होंने कहा कि यदि किसी जमीन या संपत्ति का इस्तेमाल अवैध तरीके से किया गया है तो सरकार की जिम्मेदारी है कि उसे कानून के अनुसार कार्रवाई करते हुए जनहित में इस्तेमाल करे. उन्होंने सवाल उठाया कि देश में आक्रांताओं के नाम पर विश्वविद्यालय बनवाकर आखिर समाजवादी पार्टी क्या संदेश देना चाहती थी.
उन्होंने कहा कि देश में अनेक स्वतंत्रता सेनानी, ऋषि और महापुरुष हुए हैं, जिनके नाम पर संस्थानों का निर्माण किया जा सकता था. गलत तरीके से जमीन और धन का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में जनता के हित में नहीं हो सकता. ईडी और सीबीआई अपने स्तर पर कार्रवाई करेंगी और यदि कोई संपत्ति अवैध पाई जाती है तो उसे जनउपयोगी बनाना सरकार की जिम्मेदारी है.
यूपी में सपा की सरकार बनाने के अखिलेश के दावे पर तंज
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर अखिलेश यादव के सरकार बनाने के दावे पर नरेंद्र कश्यप ने कहा कि दावा करने में आखिर क्या ही जाता है. बिहार, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, असम, महाराष्ट्र और हरियाणा के चुनावों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने कई जगह बड़े दावे किए, लेकिन चुनाव परिणाम उनके पक्ष में नहीं रहे.
बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान अखिलेश यादव ने 16 सभाएं की थीं और जिन सीटों पर उन्होंने सभाएं कीं, वहां पार्टी को हार का सामना करना पड़ा. अखिलेश यादव को भी अंदाजा है कि 2027 में समाजवादी पार्टी का राजनीतिक हश्र खराब होने वाला है. सरकार बनाने का दावा करके अखिलेश यादव अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं.
पीडीए के P में पंडित बताए जाने पर नरेंद्र कश्यप का निशाना
अखिलेश यादव की ओर से पीडीए में 'पी' को पंडित बताए जाने पर भी नरेंद्र कश्यप ने निशाना साधा. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव बार-बार अपनी राजनीतिक परिभाषाएं बदलते हैं. समाजवादी पार्टी का नाम समाजवाद के आधार पर रखा गया था और राममनोहर लोहिया के संघर्ष से समाजवादी विचारधारा जुड़ी रही है, लेकिन अब समाजवादी पार्टी ने पीडीए को अपना राजनीतिक आधार बना लिया है. समय-समय पर पीडीए की परिभाषा बदली जाती रही है.
उन्होंने दावा किया कि ब्राह्मण, पिछड़ा और दलित समाज अब इस राजनीति को समझ चुका है. अलग-अलग वर्गों को जोड़ने के लिए पीडीए की परिभाषा बदलने की कोशिश आने वाले समय में समाजवादी पार्टी के लिए नुकसानदेह साबित होगी.
सपा पर परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति करने का आरोप
समाजवादी पार्टी पर परिवारवाद और जातिवाद की राजनीति करने का आरोप लगाते हुए नरेंद्र कश्यप ने अखिलेश यादव से सवाल किया कि यदि 2027 में उनकी सरकार बनती है तो मुख्यमंत्री कौन होगा, इसकी घोषणा क्यों नहीं की जाती.
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि समाजवादी पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष कौन होगा. कश्यप ने तंज कसते हुए कहा कि इन पदों पर भी यदि परिवार के लोगों की ही दावेदारी रहेगी और उसके बाद पीडीए की बात की जाएगी तो जनता इसे समझ रही है.
विपक्षी नेताओं को बताया 'आउट ऑफ डेट लीडर'
उन्होंने कहा कि 2024 के चुनाव में हुई कथित राजनीतिक गलतियों और कमियों को जनता अब समझ चुकी है. कश्यप ने अखिलेश यादव, राहुल गांधी, ममता बनर्जी और तेजस्वी यादव पर निशाना साधते हुए उन्हें 'आउट ऑफ डेट लीडर' बताया और दावा किया कि इन नेताओं की विश्वसनीयता कम हुई है.
राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) को लेकर अखिलेश यादव की टिप्पणी पर भी नरेंद्र कश्यप ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव का बयान उनके अंदर आए अहंकार और घमंड को दर्शाता है. जिस आरएलडी को अखिलेश यादव कथित तौर पर 'चवन्नी' कहकर संबोधित कर रहे हैं, उस पार्टी की स्थापना पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह ने की थी. चौधरी चरण सिंह ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और देश के प्रधानमंत्री के रूप में देश और प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण कार्य किए.
उन्होंने आरोप लगाया कि आरएलडी को इस तरह संबोधित कर अखिलेश यादव ने पार्टी के कार्यकर्ताओं और जाट समाज का अपमान किया है. आने वाले समय में अखिलेश यादव को इस राजनीतिक बयान का नुकसान उठाना पड़ सकता है.
