मोदी सरकार द्वारा आज संसद में पेश किए गए केंद्रीय बजट पर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है. गहलोत ने इस बजट को राजस्थान की उम्मीदों पर पानी फेरने वाला बताते हुए केंद्र सरकार पर प्रदेश के साथ 'सौतेले व्यवहार' का आरोप लगाया है.

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अशोक गहलोत ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के सबसे बड़े राज्य राजस्थान का बजट भाषण में कोई उल्लेख तक नहीं किया गया. उन्होंने इसे राजस्थान की जनता का अपमान बताते हुए कहा कि प्रदेश को इस बजट से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन वित्त मंत्री के भाषण में राजस्थान पूरी तरह नदारद रहा.

ERCP और विकास परियोजनाओं पर चुप्पी

पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विशेष रूप से ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (ERCP) का मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा, ''प्रदेश की प्यास बुझाने वाली इतनी बड़ी परियोजना को लेकर केंद्र ने कोई स्पष्ट रोडमैप या विशेष आर्थिक सहायता की घोषणा नहीं की. बजट में राजस्थान के लिए किसी भी नई रेलवे परियोजना या मेट्रो प्रोजेक्ट का ऐलान न होना यह दर्शाता है कि केंद्र की प्राथमिकता में राजस्थान का विकास नहीं है.''

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गरीबों और असंगठित क्षेत्र को मिली निराशा

गहलोत ने बजट को आम आदमी के खिलाफ बताते हुए कहा कि इसमें गरीब, श्रमिकों और असंगठित क्षेत्र की एक बड़ी आबादी के लिए राहत का कोई बड़ा प्रावधान नहीं है. बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी के बीच यह वर्ग इस बजट से किसी बड़ी योजना की उम्मीद कर रहा था, लेकिन उनके हाथ खाली रहे.

'ऊंची दुकान, फीका पकवान'

डबल इंजन सरकार के दावों पर तंज कसते हुए गहलोत ने इस बजट को राजस्थान के संदर्भ में 'damp squib' (ऊंची दुकान, फीका पकवान) करार दिया. उन्होंने कहा कि प्रदेश में भाजपा की सरकार होने के बावजूद राजस्थान को बजट में कुछ न मिलना यह साबित करता है कि 'डबल इंजन' की बात केवल चुनावी जुमला है और वास्तविकता में इसका कोई लाभ धरातल पर नहीं दिख रहा है.

अशोक गहलोत की यह प्रतिक्रिया स्पष्ट करती है कि आने वाले दिनों में राजस्थान की अनदेखी और विकास परियोजनाओं को लेकर विपक्ष सरकार की घेराबंदी तेज करेगा.