Rajasthan News: एक समय में उदयपुर (Udaipur) रणथंभौर राष्ट्रीय उद्यान (Ranthambore National Park) का राजा कहे जाने वाले टाइगर-24 या कहे उस्ताद गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं. टाइगर-24 को पैर में हड्डियों का कैंसर हो गया है. पिछले दाए पैर में सिमिलर हड्डी बाहर निकल रही है. इसी कारण वह अभी सिर्फ तीन पैर से ही चल पा रहा हैं और पिछले दाए पैर को हवा में ही रख रहा है. इस बीमारी को डॉक्टर ऑस्टियो सार्कोमा (Osteosarcoma) बता रहे हैं. हालांकि, उसकी दहाड़ कम नहीं हुई है. अभी वो खाना अच्छे से खा रहा है. अभी उस्ताद उदयपुर के सज्जनगढ़ बॉयोलॉजिकल पार्क (Sajjan Garh Biological Park) में है लेकिन उसे जब से रणथंभौर से लाया गया है तब से लोगों से अलग एनक्लोजर में रखा हुआ है.
प्राथमिक उपचार किया गयाबॉयोलॉजिकल पार्क के डॉक्टर हंस कुमार जैन ने एबीपी न्यूज़ को बताया कि उस्ताद के पिछले दाए पैर में हड्डी बढ़ रही है. वह चल तो पा रहा है लेकिन पिछला एक पैर उठाकर चल रहा है, क्योंकि उसके पैर में दर्द हो रहा है. जयपुर वरिष्ठ डॉक्टर्स की टीम के साथ इसका प्राथमिक उपचार किया गया जिसमें दर्द निवारक दवाईयां दी. अभी ज्यादा दवाइयां भी नहीं दे सकते है, इसलिए अब आगे के उपचार के लिए सलाह ली जा रही है. वैसे खाने और पीने में इसे कोई समस्या नहीं आ रही है. जो उसे रोजाना डाइट दी जा रही थी वही दे रहे हैं. अब आगे क्या उपचार देना है इसके लिए इंडियन वेयनरी रिसर्च इंस्टीट्यूट को पत्र लिखकर जानकारी दी गई है. विशेषज्ञ यह भी बता रहे हैं कि ऑपेरशन करना भी काफी चुनौती का काम होगा लेकिन आपरेशन के बाद भी ठीक हो जाए यह पक्का नहीं कह सकते. इसके बाद भी परेशानी हो सकती है.
पेट की बीमारी भी झेल चुके हैं उस्तादहड्डी कैंसर ही नहीं इससे पहले भी उस्ताद बीमार हो चुका है और हालात बिगड़ चुकी है. कुछ समय पहले उस्ताद को पेट की बीमारी ने जकड़ लिया था. वह ठीक से खाना डाइजेस्ट नहीं कर पा रहा था जिसके लिए प्रदेश के बाहर से डॉक्टर को बुलाया गया था और उपचार हुआ. उसे तब से कीमा को गर्म कर खिलाया जाता है.
सिर्फ इसे देखने आते थे पर्यटकवन विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार रणथंभौर के टाइगर-20 (झूमरू) और टाइगर-22 (गायत्री) के मिलन पर टाइगर-24 उस्ताद साल 2005 में पैदा हुआ था. रणथंभौर में उस्ताद की संगीनी टाइगर-39 (नूर) थी. उस्ताद रणथंभौर में 9-10 साल तक रहा जहां लोग सिर्फ उसे ही देखने आते थे. यह इतना अच्छा दिखाए देने वाला बाघ है कि लोग स्पेशल इसे ही देखने के लिए आते थे. इसकी साइटनिंग अक्सर टाइग्रेस नूर के साथ दिखाई देता था. मीलो तक इसकी दहाड़ सुनाई देती थी.
ऐसे बदली जिंदगी और मिली उम्र कैदविभागीय रिकॉर्ड के अनुसार उस्ताद ने जुलाई 2010, मार्च 2012 में दो ग्रामीणों और अक्टूबर 2012 में रणथंभौर के फॉरेस्ट गार्ड पर हमला किया था जिससे उनकी मौत हो गई थी. वहीं 8 मई 2015 को उस्ताद ने रणथंभौर के फॉरेस्ट गार्ड रामपाल सैनी को मार दिया था. यहां से उसकी जिंदगी बदल गई. इसके बाद से उस्ताद की पहचान और ज्यादा बढ़ गई. फिर उसे रणथंभौर से शिफ्ट करने की कवायद शुरु हुई और साल 2015 में ही उदयपुर सज्जनगढ़ बॉयोलॉजिकल पार्क में भेजा गया. उस्ताद 60-100 वर्ग किमी एरिया से एक हैक्टेयर के एनक्लोजर में आ गया. ऐसे में ये उसके लिए उम्रकैद हो गई.
