राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार (30 जनवरी) का दिन हंगामेदार रहा. प्रश्नकाल के दौरान नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने प्रदेश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और जर्जर स्कूल भवनों को लेकर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर पर तीखा हमला बोला. जूली ने आंकड़ों का 'चक्रव्यूह' रचते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया और पूछा कि आखिर प्रदेश के नौनिहालों का भविष्य कब तक खुले मैदानों और मुर्गी फार्मों के भरोसे रहेगा?

Continues below advertisement

टीकाराम जूली ने सदन में चौंकाने वाले सरकारी आंकड़े पेश करते हुए बताया कि प्रदेश के 45,365 स्कूलों में से 41,178 स्कूल (लगभग 90-95%) ऐसे हैं, जिन्हें तत्काल मरम्मत की जरूरत है. उन्होंने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षा विभाग की अपनी रिपोर्ट के अनुसार 3,768 स्कूल भवन पूरी तरह जर्जर हैं, लेकिन सरकार ने अब तक केवल 2,558 को ही कागजों पर 'जर्जर' माना है. शेष 1,210 स्कूलों में बच्चों की जान दांव पर लगी है.

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा, "कहीं मंदिर-अस्पताल तो कहीं मुर्गी फार्म में स्कूल चल रहे हैं. नौनिहालों का भविष्य अंधकार में है और सरकार संवेदनहीन बनी हुई है."

Continues below advertisement

तबादलों पर तंज: 'सरकार बिल्डिंग नहीं, ट्रांसफर उद्योग चलाने में व्यस्त'

जूली ने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान आधारभूत ढांचे को सुधारने के बजाय राजनीति पर अधिक है. उन्होंने कहा कि जनवरी की कड़ाके की ठंड में जब स्कूलों के लिए बजट स्वीकृत होना चाहिए था, तब पूरी सरकार 'तबादलों के खेल' में व्यस्त है. उन्होंने कहा कि बच्चों को जर्जर भवनों से निकालकर 5-10 किलोमीटर दूर भेजा जा रहा है, लेकिन उनके पास वहां तक पहुँचने के लिए परिवहन के साधन तक नहीं हैं.

शिक्षा मंत्री की कार्यशैली पर कड़ा प्रहार

बहस के दौरान माहौल तब और गर्मा गया जब जूली ने शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की कार्यकुशलता पर सीधा हमला बोला. उन्होंने पुरानी घटना का जिक्र करते हुए कटाक्ष किया, "जो मंत्री दौरे के वक्त 'Knowledge' की स्पेलिंग तक सही नहीं लिख पाए, उनसे प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था सुधारने की उम्मीद कैसे की जा सकती है?" इस दौरान जूली ने सत्ता पक्ष पर उनकी आवाज दबाने और माइक बंद करने का भी आरोप लगाया.

OBC छात्रवृत्ति पर भी सरकार को घेरा

शिक्षा के अलावा नेता प्रतिपक्ष ने पिछड़ा वर्ग (OBC) के छात्रों का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया. उन्होंने सरकार से दो साल का हिसाब मांगते हुए पूछा कि कितने ओबीसी विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति के लिए आवेदन किया? वास्तव में कितने विद्यार्थियों को अब तक लाभ मिला? उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार पिछड़ों और युवाओं के हक पर 'कुंडली' मारकर बैठी है और उन्हें उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है.

निष्कर्ष

विधानसभा की इस गहमागहमी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले समय में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी ढांचे का मुद्दा सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनने वाला है. विपक्ष के इन तीखे सवालों का अब जनता सरकार से जवाब मांग रही है.