अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए कथित हमले और वहां के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह खामेनेई की मौत को लेकर देश में सियासी और धार्मिक बयानबाजी तेज हो गई है. इस बीच भारत के कुछ मुस्लिम संगठनों द्वारा ईद का त्योहार नहीं मनाने के फैसले ने विवाद को और बढ़ा दिया है. विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) ने इस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देश में अशांति फैलाने की कोशिश करार दिया है और इसे राष्ट्र विरोधी कदम बताया है.

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खामेनेई का भारत से कोई लेना-देना नहीं- अमितोष परीक

विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता अमितोष परीक का कहना है कि इस फैसले के पीछे कोई बड़ी राजनीतिक साजिश है. मुसलमानों को गुमराह कर उन्हें ऐसा करने के लिए कहा जा रहा है. खामेनेई का भारत से कोई लेना-देना नहीं है. जिस व्यक्ति का भारत से कोई लेना-देना ना हो, उसके लिए मातम मानना और देश की कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करना तमाम सवाल खड़े करता है.

तरुण की हत्या पर क्यों नहीं मनाया कोई मातम- अमितोष परीक

अमितोष परीक ने कहा कि खामेनेई ने तमाम मौकों पर मानवता के खिलाफ बात की है और काम किया है. खामनेई के राज में महिलाओं का शोषण और उन पर अत्याचार हुआ है. जो लोग आज खामेनेई की मौत पर आंसू बहा रहे हैं, प्रदर्शन कर रहे हैं. उन्होंने पहलगाम हमले के बाद त्योहार नहीं मनाने का फैसला क्यों नहीं लिया था. जब देश पर आतंकवादी हमले होते थे, तब त्योहार नहीं मनाने का फैसला क्यों नहीं लेते थे. दिल्ली के तरुण की हत्या पर कोई मातम क्यों नहीं मनाया गया.

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देश के माहौल को खराब करने की हो रही साजिश- प्रवक्ता

वीएचपी के प्रवक्ता ने कहा कि खामेनेई की मौत पर यूपी से लेकर राजस्थान और कश्मीर तक लगातार हो रहे प्रदर्शन तमाम सवाल खड़े कर रहे हैं. यह देश के माहौल को खराब करने की बड़ी साजिश है. इस साजिश के पीछे सियासी पार्टियां हैं. यह कतई कहीं से भी उचित नहीं है. इसके पीछे की सच्चाई का पता लगाया जाना चाहिए और सरकार को उचित व सख्त कदम उठाने चाहिए.

प्रवक्ता अमितोष परीक के मुताबिक देश से जुड़े तमाम मुद्दों पर चुप रहना और खामेनेई की मौत पर आंसू बहते हुए ईद जैसा त्योहार नहीं मनाना कोई सामान्य बात नहीं है. इसके पीछे बड़ी साजिश है. इसलिए हम इस पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

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