उदयपुर के महाराणा भूपाल अस्पताल (MB अस्पताल) में डॉक्टरों की टीम ने बेहद जटिल और जोखिम भरी सर्जरी कर एक आदिवासी छात्र की जान बचाई है. डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा स्थित पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय में तीरंदाजी अभ्यास के दौरान छात्र विकास नानोमा के सीने में तीर जा घुसा.

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तीर छाती की हड्डी को पार करते हुए दिल के दाहिने वेंट्रिकल में फंस गया था. करीब 4 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने तीर को सफलतापूर्वक बाहर निकाल लिया. इस तरह छात्र की जान बच गई, जिसमें डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की अहम भूमिका रही. 

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तीर लगने के बाद बिगड़ी हालत

बताया जा रहा है कि विद्यालय में बच्चे तीरंदाजी का अभ्यास कर रहे थे. इसी दौरान छात्र विकास नानोमा अचानक तीर की चपेट में आ गया. तीर सीधे उसके सीने में जा घुसा. गंभीर हालत में स्कूल प्रबंधन ने उसे स्थानीय अस्पताल पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद छात्र को तत्काल उदयपुर के एमबी अस्पताल रेफर किया गया.

आधी रात को सीटी स्कैन, दिल तक पहुंचा था तीर

एमबी अस्पताल की इमरजेंसी में डॉ. विष्णु प्रताप ने छात्र की स्थिति को संभाला. इसके बाद डॉ. कुशल गहलोत ने तत्काल सीटी स्कैन किया. जांच में सामने आया कि तीर स्टर्नम और पेरिकार्डियम को चीरते हुए दिल के दाहिने वेंट्रिकल में फंसा हुआ था. तीर लगने से लगातार रक्तस्राव हो रहा था, जिसके चलते दिल के चारों ओर खून जमा हो गया था. इससे कार्डियक टैम्पोनैड जैसी जानलेवा स्थिति बन गई थी.

कार्डिएक सर्जन की अगुवाई में शुरू हुआ ऑपरेशन

मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रिंसिपल डॉ. राहुल जैन और मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. आर.एल. सुमन के निर्देशन में कार्डिएक सर्जन डॉ. विनय नैथानी की अगुवाई में विशेषज्ञ टीम बनाई गई. डॉक्टरों ने बिना समय गंवाए छात्र को ऑपरेशन थिएटर में लिया.

दाहिनी तरफ से थोराकोटॉमी सर्जरी की गई और बेहद सावधानी के साथ तीर को दिल से बाहर निकाला गया. इसके बाद दिल में हुए घाव को सिलकर रक्तस्राव को नियंत्रित किया गया. करीब 4 घंटे चले ऑपरेशन के दौरान छात्र को 4 यूनिट रक्त भी चढ़ाया गया.

डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की अहम भूमिका

इस जटिल सर्जरी में डॉ. विनय नैथानी के साथ डॉ. नरेश, डॉ. जसवंत, एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. संदीप शर्मा, डॉ. अंजुरी गोयल और नर्सिंग स्टाफ से दुर्गा मीणा की अहम भूमिका रही. कई घंटे की मशक्कत के बाद डॉक्टरों ने छात्र की जान बचा ली. फिलहाल विकास नानोमा खतरे से बाहर बताया जा रहा है और तेजी से रिकवर कर रहा है. इस जटिल मामले में डॉक्टरों की तत्परता और विशेषज्ञता ने छात्र को नई जिंदगी दी.

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