Padma Bhushan Award 2025: गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर केंद्र सरकार ने कई हस्तियों को पद्म पुरस्कार दिए हैं. सरकार ने 19 हस्तियों को पद्म भूषण अवार्ड से नवाजा है, जिनमें साध्वी ऋतंभरा का नाम भी आया है. साध्वी को सामाजिक कार्यों के लिए ये सम्मान दिया गया है.

पद्म भूषण अवार्ड से सम्मानित की गईं साध्वी ऋतंभरा राम मंदिर आंदोलन से भी जुड़ी रही हैं. उन्होंने इस आंदोलन में बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया था. पंजाब के लुधियाना में उनका जन्म हुआ. दीदी मां के नाम से प्रसिद्ध साध्वी ऋतंभरा की कथावाचक के तौर पर भी खास पहचान है.

'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन में विश्वास

पिछले कुछ सालों में साध्वी ऋतंभरा देश की सबसे प्रमुख भारतीय अध्यात्मवादी के रूप में उभरी हैं. हालांकि ऐसे कई लोग हैं जो उनकी आध्यात्मिक प्रवृति और दैवीय स्नेह से मंत्रमुग्ध हो गए. यह केवल साध्वी ऋतंभरा ही हैं जिन्होंने इस स्नेह को ढालने का बेहतर प्रयास किया है. दीदी मां का जन्म भले ही भारत में हुआ लेकिन वो 'वसुधैव कुटुंबकम' के दर्शन में विश्वास करती हैं.

बेसहारा और बुजुर्ग महिलाओं के लिए काम

उनका मानना है कि संपूर्ण विश्व उनका घर है और इस विश्व में हर कोई उसका दिव्य प्रेम और स्नेह पाने का पात्र है. इसके अलावा उनका महिला सशक्तिकरण में भी दृढ़ विश्वास है, यही वजह है कि इस दिशा में उनके द्वारा काफी काम किया गया है. लेकिन दीदी मां का सबसे उल्लेखनीय कार्य वात्सल्य ग्राम- 'मातृ प्रेम का गांव' है.

उन्होंने अनाथ बच्चों, बेसहारा और बुजुर्ग महिलाओं के लिए परिवार की एक अनूठी अवधारणा विकसित की है. दीदी मां के नाम से मशहूर साध्वी अक्सर कहती हैं कि 'विश्वनाथ' और 'रघुनाथ' की धरती पर कोई कैसे अनाथ हो सकता है. 

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर 139 हस्तियों को पद्म पुरस्कारों से नवाजा है. इनमें 113 लोगों को पद्मश्री, 7 को पद्म विभूषण और 19 हस्तियों को पद्म भूषण अवार्ड दिया है.

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