पिछले कुछ हफ्तों से पंजाब और हरियाणा बाढ़ की मार झेल रहे थे. बुधवार (24 सितंबर) को दक्षिण-पश्चिम मानसून ने दोनों राज्यों और चंडीगढ़ से विदाई ले ली. मौसम विभाग ने बताया कि लगभग एक हफ्ते पहले से ही मानसून इन इलाकों से पीछे हटना शुरू कर चुका था.

पंजाब में अगस्त महीने में 253.7 मिमी बारिश हुई, जो औसत से 74 फीसदी ज्यादा थी. यह पिछले 25 सालों में राज्य में सबसे अधिक बारिश रही. हरियाणा में भी अगस्त में 194.5 मिमी बारिश दर्ज की गई, जो महीने के औसत 147.7 मिमी से काफी अधिक है.

इन भारी बारिशों के कारण पंजाब ने दशकों में अपनी सबसे गंभीर बाढ़ का सामना किया. सतलुज, ब्यास और रावी नदियों में उफान आया और कई मौसमी नालों से पानी बाहर आया.

इस बाढ़ में 57 लोगों की जान चली गई. हरियाणा के कई इलाकों में भी बाढ़ और जलभराव देखा गया. दोनों राज्यों में हजारों एकड़ फसलें बर्बाद हो गईं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ.

तापमान सामान्य से ऊपर

बाढ़ के बाद भी बुधवार (24 सितंबर) को पंजाब और हरियाणा के अधिकांश हिस्सों में तापमान सामान्य से ऊपर दर्ज किया गया. चंडीगढ़ में अधिकतम तापमान 35.3 डिग्री सेल्सियस था, जो सामान्य से 3 डिग्री ज्यादा था. हरियाणा के करनाल में तापमान 34 डिग्री सेल्सियस, हिसार और नारनौल में 36.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया.

पंजाब के पटियाला में 35.2 डिग्री सेल्सियस, अमृतसर में 34 और लुधियाना में 34.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया. इस दौरान हवा हल्की और आर्द्रता कम रही, जिससे लोग गर्मी और उमस का अहसास कर रहे थे.

लोगों को गर्मी कर सकती है परेशान

मौसम विभाग का कहना है कि अगले पांच-छह दिनों तक पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ में अधिकतर शुष्क मौसम रहेगा. बारिश की संभावना फिलहाल कम है, लेकिन धूप और गर्मी के चलते लोगों को हल्की गर्मी का सामना करना पड़ सकता है.

विभाग ने कहा है कि किसानों को फसल की सुरक्षा के लिए सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि बाढ़ के बाद जमीन में नमी अभी भी बनी हुई है.

बाढ़ से प्रभावित इलाकों में धीरे-धीरे हालात सुधर रहे हैं. कई स्थानों पर पानी उतर चुका है, लेकिन कई जगहों पर जलभराव अभी भी देखा जा रहा है. लोग राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन ने सतर्क रहने की हिदायत दी है.