पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने शुक्रवार को राज्य विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव पेश किया. यह प्रस्ताव चर्चा के बाद पास हो गया. हालांकि इसमें 6 विधायकों ने अलग-अलग वजहों से मतदान नहीं किया. पंजाब विधानसभा के कुल 94 विधायकों में से आम आदमी पार्टी के 88 विधायक आज सदन में मौजूद रहे.

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छह विधायक गैरहाजिर रहे, जिनमें कुंवर विजय प्रताप शामिल हैं, जो पहले ही पार्टी से निलंबित किए जा चुके हैं. इसके अलावा लालजीत भुल्लर और हरमीत सिंह पठानमाजरा जेल में होने के कारण उपस्थित नहीं हो सके. दवेंद्र जीत सिंह लाडी धौंस बीमारी के चलते अनुपस्थित रहे, जबकि मनजिंदर सिंह लालपुरा और जसविंदर सिंह अटारी सदन में नहीं पहुंचे.

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मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार ने यह कदम अरविंद केजरीवाल नीत ‘AAP’के सात राज्यसभा सदस्यों के पाला बदलकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल होने की घटना के कुछ दिन बाद उठाया है.

विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान, मुख्यमंत्री भगवंत मान ने विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि AAP मजबूत है और उसका विस्तार हो रहा है.

मान ने सदन में विश्वास प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि ऐसी अफवाहें हैं कि ‘AAP’ का सफाया हो जाएगा और उसके विधायक पाला बदल लेंगे,इससे लोगों के मन में भ्रम की स्थिति पैदा होती हैं.

जम्मू-कश्मीर से लेकर गोवा तक, पार्टी- सीएम मान

उन्होंने कहा, 'पार्टी मजबूत है. जम्मू-कश्मीर से लेकर गोवा तक, पार्टी की मौजूदगी है. जम्मू-कश्मीर के डोडा में हमारा एक विधायक है. पंजाब में हमारी सरकार सफलतापूर्वक चल रही है. दिल्ली में हम विपक्ष में हैं. गुजरात में हमारे पांच और गोवा में दो विधायक हैं.'

मान ने कहा, 'इसके अलावा ‘AAP’ के विभिन्न स्थानीय निकायों में महापौर, पार्षद, सरपंच हैं, पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर उपस्थिति है.' सत्तारूढ़ दल ने इससे पहले सभी विधायकों को एक दिवसीय सत्र में उपस्थित होने के लिए ‘व्हिप’ जारी किया था.

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पंजाब की 117 सदस्यीय विधानसभा में AAP को भारी बहुमत प्राप्त है और उसके पास 94 विधायक हैं. सदन में कांग्रेस के 16, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का एक, शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के तीन, BJP के दो विधायक हैं जबकि एक निर्दलीय विधायक है.

24 अप्रैल को सात सांसद हुए बागी

AAP को 24 अप्रैल को उस समय बड़ा झटका लगा जब उसके 10 राज्यसभा सदस्यों में से सात - राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, संदीप पाठक, हरभजन सिंह, राजेंद्र गुप्ता, विक्रमजीत साहनी और स्वाति मालीवाल - ने पार्टी के सिद्धांतों, मूल्यों और मूल सिद्धांतों से भटकने का आरोप लगाते हुए पार्टी छोड़ दी और BJP में शामिल हो गए. पार्टी छोड़ने वाले सात सांसदों में छह पंजाब से निर्वाचित हुए हैं.

राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सोमवार को आधिकारिक तौर पर सातों सांसदों के BJP में विलय को मंजूरी दे दी, जिससे उच्च सदन में AAP के सदस्यों की संख्या घटकर तीन रह गई.