एक तरफ पंजाब सरकार जहां दावा कर रही है कि राज्य में नशे को खत्म करने के लिए 'युद्ध नशे के विरुद्ध' चलाया जा रहा है और इसका दूसरा फेज पंजाब में चल रहा है. वहीं दूसरी तरफ अमृतसर में पंजाब पुलिस के ही एक हेड कॉन्सटेबल के बेटे की संदेहास्पद स्थितियों में मौत हुई है और इस पर पुलिस की कार्रवाई ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. इस घटना ने नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान की कामयाबी और पंजाब पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं. 

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ड्रग डीएडिक्शन सेंटर में कराया गया था भर्ती

शुक्रवार 13 फरवरी को अमृतसर के इस्लामाबाद पुलिस थाने के अंतर्गत आते गुरु नानकपुरा मोहल्ले के 26 वर्षीय आकाशदीप की मौत हो गई. उनके पिता अशोक कुमार पंजाब पुलिस में हेड कॉन्सटेबल हैं. पिता के मुताबिक घटना से एक दिन पहले (12 फरवरी) आकाशदीप ड्रग डीएडिक्शन सेंटर से डिस्चार्ज होकर आया था. वो नशे का आदि था जिसके चलते उसे ड्रग डीएडिक्शन सेंटर में भर्ती करवाया गया था. 

घटना वाले दिन आकाशदीप अपने एक दोस्त के साथ गया था. परिवार को ये सूचना मिली कि आकाशदीप गाड़ी में बेसुध पड़ा है. परिवार उसे घर लाया, मगर कुछ देर बाद ही उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे अस्पताल ले जाया गया और वहां उसकी मौत हो गई. 

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पिता ने नशे की ओवरडोज की कही थी बात

जिस दिन आकाशदीप की मौत हुई उस दिन उसके पिता अशोक कुमार ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की मौत नशे की ओवरडोज से हुई है. उन्होंने कहना था कि पंजाब में नशा आसानी से उपलब्ध होता है और जो सरकार दावे कर रही है कि नशे के खिलाफ अभियान राज्य में चलाया गया है तो उसका कोई असर नहीं पड़ रहा है. 

उन्होंने कहा था कि पंजाब के लोग अगर अपने बच्चों को नशे से बचाना चाहते हैं तो उन्हें राज्य से बाहर भेज दें. हालांकि अगले ही दिन अमृतसर पुलिस ने अशोक कुमार का एक वीडियो मीडिया में सांझा किया जिसमें उसने कहा कि जो कुछ भी उसने बोला था, वो भावनाओं में आकर कह दिया था. 

'बेटे का पार्थिव शरीर देखकर भावुक हो गया था'

पुलिस द्वारा सांझा किए गए वीडियो में अशोक कुमार ने कहा था कि वे अपने बेटे का पार्थिव शरीर देखकर भावुक हो गए थे और सरकार के खिलाफ काफी कुछ बोल दिया था जो उन्हें नहीं बोलना चाहिए था. उन्होंने कहा था कि उन्हें नहीं मालूम कि उनके बेटे की मौत कैसे हुई है. वहीं अमृतसर के अस्सिटेंट पुलिस कमिश्नर जसपाल सिंह ने घटना के अगले दिन दिए गए बयान में कहा था कि आकाशदीप के शरीर पर ऐसा कोई निशान नहीं मिला है जिससे ये पता चले कि उसने नशा किया था. उन्होंने कहा कि परिवार ने भी इस मामले में कोई कार्रवाई करवाने से मना कर दिया है. 

इस मामले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर इसलिए भी सवाल उठते हैं कि बजाय पोस्टमार्टम करवाए ये पता लगाने की कोशिश की जाती कि ये मौत नशे की ओवरडोज से हुई है या नहीं. पुलिस ने मृतक का पोस्टमार्टम नहीं किया क्योंकि परिवार ने इसके लिए सहमति नहीं दी.