महाराष्ट्र के पुणे जिले में विवाद तब खड़ा हो गया जब यहां केंद्र सरकार के रिसर्च इंस्टीट्यूट की लाइब्रेरी में उमर खालिद की किताब मिली. पुणे का IISER केंद्र सरकार का साइंस एजुकेशन और रिसर्च इंस्टिट्यूट है. यहां उमर खालिद की किताब को लेकर आपत्ति जताई गई. उमर खालिद की Ph.D रिसर्च पर आधारित यह किताब इंस्टीट्यूट की श्रीनिवास रामानुजन लाइब्रेरी में शामिल की गई थी.
हालांकि, खबर है कि इस किताब को शामिल करने पर सोशल मीडिया पर आपत्ति जताए जाने के बाद किताब को लाइब्रेरी से वापस ले लिया गया.
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साल 2018 में उमर खालिद की रिसर्च स्टडी
इस किताब का नाम 'फ्रैक्चर्ड कम्युनिटीज़: आदिवासी हिस्ट्रीज़ एंड द पॉलिटिक्स ऑफ पावर' है. यह किताब झारखंड के सिंहभूम इलाके में आदिवासी समुदाय के इतिहास, ब्रिटिश काल के एडमिनिस्ट्रेटिव सिस्टम और आदिवासी समुदायों के बीच पावर रिलेशन की स्टडी करती है.
उमर खालिद ने यह थीसिस साल 2018 में जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में सबमिट की थी और उन्हें साल 2019 में Ph.D की डिग्री मिली थी.
JNU में उठी उमर खालिद की रिहाई की मांग
इससे एक दिन पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) परिसर में 'उमर खालिद को रिहा करो' और 'नक्सलबाड़ी जिंदाबाद' जैसे नारे लिखे जाने का आरोप लगाया है. ABVP ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है. ABVP की JNU इकाई ने एक बयान में वामपंथी छात्र संगठनों से जुड़े कार्यकर्ताओं पर परिसर की दीवारों पर आपत्तिजनक नारे लिखने का आरोप लगाया.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की छात्र शाखा ने भी दावा किया कि वीडी सावरकर के चित्र के पास आपत्तिजनक टिप्पणियां लिखी गईं. ये आरोप जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में भी इसी तरह के नारे लगाए जाने की खबरों के कुछ दिन बाद सामने आए हैं. जामिया में छात्र संघ बहाल करने की मांग को लेकर विरोध-प्रदर्शन तेज होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन अगले आदेश तक ऑनलाइन कक्षाएं संचालित कर रहा है.
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