पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान एनसीपी (एसपी) प्रमुख और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद पवार ने केंद्र सरकार पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया. उन्होंने पूछा कि क्या सत्ता में बैठे लोगों का अब भी बातचीत में विश्वास है? पवार ने यह भी कहा कि संसदीय लोकतंत्र की असली ताकत संवाद और चर्चा में ही है.

पड़ोसी देशों की हालत का जिक्र

अपने संबोधन में पवार ने पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश और श्रीलंका की स्थिति का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि इन देशों में अशांति और अस्थिरता देखने को मिल रही है. इसके मुकाबले भारत लगातार आगे बढ़ रहा है और इसका श्रेय हमारे संविधान और डॉ. भीमराव आंबेडकर को जाता है.

पवार ने कहा कि हमारे देश ने कई मुश्किलें देखी हैं, लेकिन संविधान की वजह से हम एकजुट होकर आगे बढ़ पाए हैं.

शरद पवार ने संसदीय लोकतंत्र की ताकत पर जोर देते हुए कहा कि संसद वो मंच है जहां सभी दलों के प्रतिनिधि बैठकर महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करते हैं. उन्होंने चिंता जताई कि आज यही प्रक्रिया खतरे में पड़ती दिख रही है.

पवार ने कहा, "लोकतंत्र में आजादी, समानता और भाईचारे में यक़ीन रखने वाला बड़ा वर्ग मौजूद है, लेकिन कभी-कभी ऐसा लगता है कि संसद को किनारे कर फैसले लिए जा रहे हैं."

नए संसद भवन के मुद्दे पर उठाए

पवार ने नए संसद भवन के मुद्दे पर भी केंद्र सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अचानक से सांसदों को नए भवन में शिफ्ट होने के लिए कहा गया, जबकि इस पर कोई चर्चा या संवाद नहीं हुआ. उन्होंने तंज कसते हुए कहा, "ऐसे बड़े फैसले संवाद के बिना कैसे लिए जा सकते हैं?"

शरद पवार का यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद की कार्यवाही और सरकार के तौर-तरीकों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है.

पवार के मुताबिक, भारत का लोकतंत्र तभी मजबूत रह सकता है जब संवाद और चर्चा की परंपरा बनी रहे. उन्होंने साफ कहा कि सत्ता में बैठे लोगों को अब यह तय करना होगा कि क्या वे अब भी बातचीत और संवाद की ताकत में भरोसा रखते हैं.