केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने सोनम वांगचुक का अनशन खत्म होने और सीजेपी का प्रदर्शन जारी रहने पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि पेपर लीक को रोकने के लिए सरकार ने कानून बनाने का निर्णय लिया है. सरकार आंदोलनकारियों की मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी. स्टूडेंट को न्याय मिलना चाहिए. उन्होंने ये भी उम्मीद जताई कि ये आंदोलन जल्द से जल्द खत्म होगा.
केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने मीडिया से बातचीत में कहा, "सोनम वांगचुक भूख हड़ताल पर बैठे थे. उनका वज़न लगभग 9-9.5 किलो कम हो गया था. इसके बाद पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया था. केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने उनसे मुलाक़ात की है और उनकी भूख हड़ताल खत्म करवाई है.''
बातचीत से कोई रास्ता निकल सकता है- रामदास अठावले
अठावले ने आगे कहा, ''बातचीत से कोई रास्ता निकल सकता है. मुझे लगता है कि अभिजीत दीपके को भी इस पर विचार करने की आवश्यकता है. हमारा कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान अगर इस्तीफा भी दे देते हैं तो सवाल रह जाता है कि पेपर लीक को कैसे रोक सकते हैं. इसलिए इसे रोकने के लिए सरकार ने कानून बनाने का निर्णय लिया है. छात्रों की मांगों पर चर्चा हो सकती है. जल्दी से आंदोलन खत्म होना चाहिए."
सरकार छात्रों की मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी- अठावले
अठावले ने ये भी कहा कि मुझे अभी पूरी जानकारी नहीं है, लेकिन अगर उनकी मांगों पर बातचीत होती है, तो कुछ गिव एंड टेक हो सकता है. दोनों तरफ़ से कुछ तालमेल बिठाया जा सकता है. सरकार भी उनकी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी. छात्रों को भी सरकार का सहयोग करना चाहिए. स्टूडेंट का तकलीफ में होना, यह अच्छी बात नहीं है. हमारी अपेक्षा है कि जल्द से जल्द सफलतापूर्वक वार्ता हो."
पेपर लीक करने वालों को कड़ी सजा मिले- अठावले
केंद्रीय मंत्री आगे कहा कि मैंने NEET पेपर लीक के मुद्दे पर पहले भी बात की है. जो हुआ वह बहुत गलत हुआ है. सरकार कानून को और मज़बूत बनाने जा रही है. फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस दायर करने की घोषणा पीएम मोदी ने की है. उन्होंने कहा, ''मेरी पार्टी की मांग है कि जो पेपर लीक होते हैं उसमें जो दोषी पाए जाएं उन्हें कड़ी सजा मिलनी चाहिए. स्टूडेंट का जो आंदोलन चल रहा है, सरकार उनके साथ बातचीत कर रही है.''
विश्वास है कि आंदोलन जल्द से जल्द खत्म होगा- अठावले
उन्होंने कहा, ''शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन करने पर पुलिस ने भी कोई आपत्ति नहीं जताई थी, क्योंकि उनको बैठने का अधिकार था, लेकिन 20 जुलाई को रेलभवन तक प्रदर्शनकारी स्टूडेंट आए थे और बैरिकेड तोड़कर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे थे. तब पुलिस ने लाठीचार्ज किया. स्टूडेंट में रोष था, पुलिस ने उनकी पिटाई की जो अच्छी बात नहीं है. इसकी पूरी जांच हो रही है. स्टूडेंट को न्याय मिलना चाहिए. उन्हें शांति से आंदोलन करना चाहिए. मुझे पूरा विश्वास है कि आंदोलन जल्द से जल्द खत्म होगा."
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