प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को स्वीडन के प्रतिष्ठित सम्मान 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार' से सम्मानित किया गया. यह स्वीडन द्वारा किसी राष्ट्राध्यक्ष को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है.'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार' प्रधानमंत्री मोदी को मिला 31वां अंतरराष्ट्रीय सम्मान है. अब इस पर देश में सियासत शुरू हो गई है. शिवसेना उद्धव बाला साहेब ठाकरे के नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने तंज कसा है. 

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महाराष्ट्र में एक प्रेस वार्ता के दौरान राउत ने इस संदर्भ में सवाल पूछे जाने पर कहा- 'वह अवॉर्ड पाने के मामले में अपनी सेंचुरी पूरी कर लेंगे. वह जिस भी देश में जाते हैं, वहां का सबसे बड़ा अवॉर्ड उन्हें ही मिलता है. इस अवॉर्ड का करेंगे क्या? वह हमसे कहते हैं कि विदेश यात्राओं पर मत जाओ, और खुद अलग-अलग देशों का दौरा कर रहे हैं.'

इससे पहले पीएम मोदी ने सोशल मीडिया साइट ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'कुछ ही देर पहले मुझे ‘रॉयल ​​ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया गया. यह न केवल मेरा, बल्कि भारत के 140 करोड़ लोगों का भी सम्मान है. यह स्वीडन में हमारे उन सभी मित्रों का भी सम्मान है, जिन्होंने भारत-स्वीडन संबंधों को मजबूत बनाने में योगदान दिया और उन्हें एक मजबूत आधार प्रदान किया.'उन्होंने कहा, 'हमारे देशों के बीच मित्रता इसी तरह बढ़ती रहे.'

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सम्मान की शुरुआत 18वीं शताब्दी में

गोथेनबर्ग में आयोजित एक विशेष समारोह में स्वीडन की क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया ने प्रधानमंत्री मोदी को 'रॉयल ​​ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया, जो स्वीडन के सबसे पुराने और सबसे प्रतिष्ठित सम्मान में से एक है, जिसकी शुरुआत 18वीं शताब्दी में की गई थी.

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, 'मित्रता की पुनः पुष्टि हुई. स्वीडन की क्राउन प्रिंसेज विक्टोरिया ने भारत-स्वीडन संबंधों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के असाधारण योगदान और उनके दूरदर्शी नेतृत्व को मान्यता देते हुए उन्हें ‘रॉयल ​​ऑर्डर ऑफ द पोलर स्टार, डिग्री कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया.'

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आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, 'रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार' सम्मान की शुरुआत 1748 में की गई थी और इसका उद्देश्य स्वीडन के हितों के लिए किए गए व्यक्तिगत प्रयासों को मान्यता देना है.