महाराष्ट्र के नाशिक में कथित अशोक खरात से जुड़ा मामला अब नया राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद बनता जा रहा है. अंधविश्वास फैलाने, ठगी करने और कई महिलाओं के कथित शारीरिक शोषण जैसे गंभीर आरोपों में जेल में बंद अशोक खरात के परिवार को महाराष्ट्र सरकार की ओर से करीब 3 करोड़ रुपये का मुआवजा दिए जाने की तैयारी है.

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दरअसल, यह मुआवजा आगामी नाशिक सिंहस्थ कुंभमेले के लिए प्रस्तावित ‘कुंभ रिंग रोड’ परियोजना के तहत जमीन अधिग्रहण के बदले दिया जा रहा है. जैसे ही यह जानकारी सामने आई, वैसे ही राजनीतिक गलियारों और सामाजिक संगठनों में सवाल उठने लगे.

आरोप है कि जिस संपत्ति को कथित तौर पर गलत तरीके से कमाए गए पैसों से खरीदा गया, उसी पर अब सरकारी मुआवजा दिया जा रहा है. मामले को लेकर जांच एजेंसियों से हस्तक्षेप की मांग भी तेज हो गई है.

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मुआवजे की राशि पर जांच एजेंसियों द्वारा लगाई जाए तत्काल रोक

इस मामले मैं अब राजनीतिक बयानबाजी और आरोप का दौर भी शुरू हो गया है. मांग ये उठ रही है कि इस मामले की जांच कर रही जांच एजेंसियों को इस डील पर तत्काल रोक लगानी चाहिए. शिकायतकर्ताओं और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि अशोक खरात ने महिलाओं को अपने जाल में फंसाकर, ठगकर और अंधविश्वास फैलाकर करोड़ों रुपये की काली कमाई की थी. जिससे उसने शहर के प्राइम लोकेशनों पर बेनामी संपत्तियां और जमीनें खरीदीं.

अब सवाल यह उठाया जा रहा है कि जिस संपत्ति को अपराध की कमाई माना जा रहा है, उसी पर सरकार द्वारा करोड़ों का मुआवजा देना कहां तक न्यायसंगत है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस मुआवजे की राशि पर जांच एजेंसियों द्वारा तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए.

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खरात की बेटियों को मुआवजा मिलना प्रस्तावित

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, भूमि अधिग्रहण (भूसंपादन) प्रक्रिया के तहत नाशिक के गोलाणे क्षेत्र की जमीन के बदले मुख्य आरोपी अशोक और उसकी पत्नी कल्पना को लगभग 82 लाख रुपये से अधिक की राशि का भुगतान की जाएगी. वहीं, पाथर्डी शिवार की जमीन के एवज में अशोक खरात की बेटियों तृप्तिबाला और स्मिता को करीब 1 करोड़ 82 लाख रुपये का मुआवजा मिलना प्रस्तावित है.

इस प्रकरण में एक नया मोड़ तब आया, जब पूर्व में विवादों के घेरे में रहे और वर्तमान में निलंबित उपजिलाधिकारी अभिजीत भांडे पाटील के परिवार का नाम भी इस भूसंपादन प्रक्रिया से जुड़ गया. चर्चा है कि इस रिंग रोड प्रोजेक्ट की भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में उनके परिवार को भी बड़ा आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है, जिससे प्रशासनिक साठगांठ की बू आ रही है.

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