महाराष्ट्र की जेलें पहले से ही बहुत ज्यादा भरी हुई हैं. कई जेलों में क्षमता से दो-तीन गुना ज्यादा कैदी हैं. आर्थर रोड जेल की ही बात करें तो वहां 999 कैदियों की जगह 3,000 से ज्यादा कैदी बंद हैं.

पिछले 8 साल से महाराष्ट्र सरकार मुंबई के मानखुर्द इलाके में ही दो जगह को आइडेंटिफाई किया ताकि उसमें से किसी एक जगह नई जेल बनाई जा सके, लेकिन 8 साल बाद अब जाकर पता चला है कि ये दोनों जगहें जेल के लिए सही नहीं हैं.

सरकार ने देवनार डिपो के पास एक 65 एकड़ का नया प्लॉट देखा है

सूत्रों ने बताया की मानखुर्द की एक जगह (मंडला) झोपड़पट्टी से घिरी हुई है और कोस्टल रेगुलेटरी जोन के तहत आती है, इसलिए यहां बड़ी जेल नहीं बनाई जा सकती. वहीं मानखुर्द की दूसरी जगह की जमीन एक साबुन कंपनी की है, जिसने कोर्ट में केस कर दिया है. जमीन लेने में कितना समय लगेगा, ये साफ नहीं है.

गृहविभाग के सूत्रों ने ABP न्यूज को बताया कि अब सरकार ने देवनार डिपो के पास एक 65 एकड़ का नया प्लॉट देखा है और वहां जेल बनाने का प्रस्ताव शहरी विकास विभाग को भेजा है.

इन जेलों में करीब 45% ज्यादा कैदी बंद हैं

आंकड़ों की माने तो महाराष्ट्र की 60 जेलों की कुल क्षमता 27,184 कैदियों की है, जहां वर्तमान में 39,527 कैदी बंद हैं, यानी की इन जेलों में करीब 45% ज्यादा कैदी बंद हैं. इनमें से अधिकतर कैदियों का केस कोर्ट में चल रहा है

सूत्रों ने आगे बताया कि महाराष्ट्र में 8 नई जेलों का निर्माण शुरू हो चुका है, बारामती में 80% काम पूरा हुआ है. पालघर और अहिल्यनगर में जेल बनाने की अभी शुरुआत हुई है वहीं सूत्रों ने आगे बताया कि 5 और नई जेलों के लिए मंजूरी की प्रक्रिया चल रही है.

17,000 कैदियों की नई व्यवस्था बनाने की तैयारी चल रही है

सरकार की योजना के मुताबिक 17,000 कैदियों की नई व्यवस्था बनाने की तैयारी चल रही है इसके अलावा पुरानी जेलों में नए बैरक बनाए जा रहे हैं. जेलों की भीड़ को कम करने के लिए विचाराधीन कैदियों की संख्या घटाने पर भी काम चल रहा है