महाराष्ट्र में तेज बरसात और कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात के बीच, हाई कोर्ट से एक खबर सामने आई, जहां पर महाराष्ट्र की राजनीति में भूचाल लाने वाले बहुचर्चित इरिगेशन स्कैम मामले में आरोपी ठेकेदार कंपनी F.A. Enterprises को बॉम्बे हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है.
अदालत ने कंपनी को लगभग 303 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है. यह वही कंपनी है, जिसके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने भ्रष्टाचार की जांच कर 30 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी और जिसमें गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था.
मौके पर माप सिर्फ 1.29 लाख क्यूबिक मीटर ही निकला
बालगंगा डैम परियोजना का ठेका साल 2009 में 353 करोड़ रुपये में दिया गया था, लेकिन 2010 तक कंपनी को भुगतान बढ़ाकर 495 करोड़ रुपये तक कर दिया गया. इसके बाद ठेकेदार ने ग्यारहवां रनिंग अकाउंट बिल यानी RA Bill, 316 करोड़ रुपये का पेश किया, जबकि साइट पर केवल 80 प्रतिशत काम हुआ था.
ACB की जांच में सामने आया कि ठेकेदार ने कंक्रीट का दावा 2 लाख क्यूबिक मीटर का किया था, लेकिन मौके पर माप सिर्फ 1.29 लाख क्यूबिक मीटर ही निकला. इसके अलावा, ठेकेदार ने कंक्रीट की दरें भी बढ़ाकर दिखाईं और झूठा दावा किया कि रेत सतारा से लाई गई है, जबकि सतारा कलेक्टर ने बयान देकर साफ किया कि पूरी रेत रायगढ़ से ही आई थी.
2016 में KIDC ने कंपनी का ठेका रद्द कर दिया
इन तथ्यों को ACB ने बोगस बिल और आपराधिक षड्यंत्र बताते हुए चार्जशीट दायर की थी. इसके बाद कंपनी ने भुगतान रुकने के कारण जून 2012 में काम बंद कर दिया, और अक्टूबर 2016 में KIDC ने कंपनी का ठेका रद्द कर दिया. इसी बीच, ACB ने भ्रष्टाचार और मिलीभगत के आरोपों में ठेकेदार और सरकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया.
कंपनी ने मामला आर्बिट्रेशन ट्रिब्यूनल में ले जाया, जहां अप्रैल 2019 में ट्रिब्यूनल ने उसके पक्ष में फैसला सुनाते हुए 303 करोड़ रुपये देने का आदेश दिया. लेकिन मई 2020 में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने यह आदेश रद्द कर दिया, और कंपनी को 50 करोड़ रुपये ब्याज सहित लौटाने का निर्देश दिया.
कोर्ट ने यह भी माना कि FIR और चार्जशीट केवल आरोप हैं
इस फैसले को चुनौती दी गई और अब 12 अगस्त 2025 को बॉम्बे हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच का आदेश पलट दिया. अदालत ने कहा कि ट्रिब्यूनल ने सबूतों और गवाहियों के आधार पर यथोचित निर्णय दिया था और सिंगल बेंच ने सबूतों का पुनर्मूल्यांकन करके अपनी सीमा से बाहर काम किया.
अदालत ने यह भी माना कि FIR और चार्जशीट केवल आरोप हैं, और जब तक दोष साबित न हो, उनका असर सिविल विवाद पर नहीं पड़ सकता. अदालत के अनुसार, कंपनी ने बांध का 80 प्रतिशत काम पूरा कर लिया है, और उसका भुगतान रोका नहीं जा सकता.
डैम का बचा हुआ काम F.A. Enterprises के हाथ में नहीं
इस फैसले के बाद, F.A. Enterprises को 303 करोड़ रुपये का भुगतान मिलेगा, और 50 करोड़ रुपये लौटाने की शर्त भी हटा दी गई है. हालांकि, डैम का बचा हुआ काम अब उसके हाथ में नहीं है, क्योंकि 2016 में उसका ठेका पहले ही रद्द कर दिया गया था.
दरअसल, महाराष्ट्र के मुख्य सचिव ने 2022 और 2023 में एक उच्चस्तरीय तकनीकी समिति (SLTAC – State Level Technical Advisory Committee) का गठन किया था, जिसमें विशेषज्ञ इंजीनियरों ने कंक्रीट की दर का मूल्यांकन किया. इस समिति ने कंक्रीट की दर 4000 रुपये प्रति क्यूबिक मीटर तय की थी.
6 गेट का डैम खड़ा करने के लिए पर्याप्त जलप्रवाह मौजूद नहीं
ACB ने अपनी जांच में महाराष्ट्र जल संसाधन विनियामक प्राधिकरण (MWRRA) का बयान भी दर्ज किया है. MWRRA ने स्पष्ट किया कि डैम निर्माण से पहले उनकी अनुमति नहीं ली गई थी. साधारण भाषा में समझें तो जिस जगह डैम बनाया गया, वहां 6 गेट का डैम खड़ा करने के लिए पर्याप्त जलप्रवाह ही मौजूद नहीं था.
इन सभी तथ्यों के आधार पर, ACB ने निष्कर्ष निकाला कि ठेकेदार और सरकारी अधिकारियों ने मिलकर दरें बढ़ाकर और झूठे बिल बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया. चार्जशीट के अनुसार, inflated rates और bogus claims एक आपराधिक साजिश का हिस्सा थे. ACB ने ठेकेदार F.A. Enterprises और संबंधित सरकारी अधिकारियों को आरोपी बनाया है.
ACB की चार्जशीट में भ्रष्टाचार के आरोप अब भी बने हुए
लगभग 16 साल तक चले इस विवाद के बाद कंपनी को राहत तो मिल गई है, लेकिन ACB की चार्जशीट में भ्रष्टाचार के आरोप अब भी बने हुए हैं. आपराधिक मुकदमा ठाणे की अदालत में लंबित है, और घोटाले की रकम का अनुमान 92 करोड़ रुपये से अधिक लगाया गया है. ACB की चार्जशीट के मुताबिक, ठीक है.
निसार खत्री के भाई, मुख्तार खत्री ने अपने बयान में बताया था कि डैम के निर्माण कार्य में सरकारी अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर मूल लागत को बढ़ा लिया गया. F.A. Enterprises और F.A. Constructions, दोनों भागीदारी फर्मों की ओर से उसका भाई निसार खत्री ही कामकाज देखता था.
अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके कम काम को ज्यादा दिखाया
अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके कम काम को ज्यादा दिखाने के लिए एमबी (Measurement Book) में झूठी एंट्रियां की जाती थीं. जैसे कि उदाहरण के तौर पर, जमीन की खुदाई में यदि केवल मुलायम पत्थर या मिट्टी की खुदाई हुई हो, तो उसे “कड़क पत्थर तोड़ने” का काम दिखाकर बिल बनाया जाता था.
इस तरह, फर्जी बिल तैयार कर सरकार को भुगतान के लिए दिए जाते थे. वहीं, इस मामले को उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अंजली दमानिया ने X पर पोस्ट करते हुए कहा कि, "अब ऐसा लगने लगा है कि लड़ने का कोई उपयोग नहीं है.
लड़ने की ताकत और इच्छा – दोनों ही खत्म - अंजली दमानिया
अंजली दमानिया ने X पर कहा कि जान की परवाह किए बिना, पागलों की तरह सिंचन घोटाले के खिलाफ लड़ाई लड़ी. उसी निसार खत्री नाम के कॉन्ट्रैक्टर को जेल तक भिजवाया और आज, उसी व्यक्ति को बचे हुए 300 करोड़ रुपये देने का आदेश उच्च न्यायालय ने दे दिया.
लड़ने की ताकत और इच्छा – दोनों ही खत्म होती जा रही हैं. दिल को बेहद गहरा दुख हो रहा है."