महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में बढ़ते मानव-वानर संघर्ष को रोकने के लिए एक बड़ा फैसला लिया है. वन विभाग की ओर से 22 अप्रैल 2026 को जारी सरकार के नए आदेश के मुताबिक अब संघर्षग्रस्त माकड़ या वानरों को सुरक्षित रूप से पकड़ने और उन्हें उनके प्राकृतिक आवास में छोड़ने के लिए 600 रुपये प्रति बंदर की दर तय की गई है.

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जन प्रतिनिधियों की मांग पर पुराने आर्थिक मापदंडों में यह सुधार किया गया है. इस योजना के तहत, शहरों में परेशानी पैदा करने वाले रिझस मकाक और हनुमान लंगूरों को सुरक्षित जाल या पिंजरों की मदद से पकड़ा जाएगा.

बंदरों को पकड़कर मानव बस्ती से दूर जंगलों में छोड़ने की पहल

पकड़े गए प्रत्येक वानर का फोटो लिया जाएगा और उन्हें मानव बस्ती से कम से कम 10 किमी दूर जंगलों में छोड़ा जाएगा. हालांकि, 600 रुपये की यह राशि इस जोखिम भरे काम के लिए कितनी व्यावहारिक होगी, इसे लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

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रिझस मकाक और हनुमान लंगूर से लोगों की बढ़ी परेशानी

दरअसल, शहरों और गांवों में रिझस मकाक और हनुमान लंगूर की बढ़ती संख्या से लोगों की परेशानी बढ़ गई है. इन बंदरों ने लोगों की नाक में दम कर रखा है. ये कभी घरों में घुसकर सामान उठाकर ले जाते हैं तो वहीं कभी कभी ये रास्तें में चल रहे लोगों पर हमला भी कर दे रहे हैं. ऐसे में इस तरह की घटनाओं के मद्देनजर प्रशासन के भी मुश्किलें बढ़ गई थी, जिसके बाद सरकार ने बड़ा फैसला लिया.

बंदरों के उत्पात लगातार बढ़ रही घटनाएं

कोंकण और पश्चिमी महाराष्ट्र के इलाकों में बंदरों का उत्पात कुछ ज्यादा ही बढ़ा हुआ है. ये बंदर किसानों की फसलों को तो नुकसान पहुंचा ही रहे हैं इसके साथ ही ये आम लोगों पर हमला कर परेशानी को बढ़ा रहे हैं. अकेले रत्नागिरी के इलाकों में पिछले दो-तीन सालों में बंदरों के हमले और नुकसान के 5,600 से ज्यादा .मामले सामने आए हैं.

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