महाराष्ट्र वासियों और अक्सर मुंबई-पुणे के बीच सफर करने वालों का लंबा इंतजार अब खत्म होने जा रहा है. राज्य के बहुप्रतीक्षित इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे का “मिसिंग लिंक” (Missing Link) अब बनकर तैयार है. आगामी 1 मई को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित करेंगे. हाल ही में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी साइट पर पहुंचकर अंतिम चरण की तैयारियों का जायजा लिया है. इस नई शुरुआत के साथ ही मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पूरी तरह से 'एक्सेस-कंट्रोल हाईवे' बन जाएगा.

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क्या है 'मिसिंग लिंक' और क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

अगर आप मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे से गुजरे हैं, तो खोपोली से लोनावला के बीच के घाट सेक्शन के ट्रैफिक जाम से जरूर वाकिफ होंगे. यह हिस्सा अपने खतरनाक मोड़ों, धीमी रफ्तार और आए दिन होने वाली दुर्घटनाओं (विशेषकर मानसून में भूस्खलन) के लिए जाना जाता है. इसी खतरनाक हिस्से को बायपास करने और सफर को सुरक्षित बनाने के लिए पहाड़ों का सीना चीरकर “मिसिंग लिंक” का निर्माण किया गया है.

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दुनिया की सबसे चौड़ी टनल में शुमार

यह प्रोजेक्ट आधुनिक इंजीनियरिंग की एक बेहतरीन मिसाल है. तेज हवाओं, भारी बारिश और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को मात देते हुए इसे तैयार किया गया है. इसकी प्रमुख खासियतें इस प्रकार हैं:

  • लंबाई और ऊंचाई: इस प्रोजेक्ट की कुल लंबाई लगभग 10.5 किलोमीटर है.
  • टाइगर वैली ब्रिज: इसमें टाइगर वैली के ऊपर हाईटेक टेक्नोलॉजी से बना 182 मीटर ऊंचा केबल-स्टेड ब्रिज (Cable-stayed bridge) शामिल है.
  • विशाल टनल का जाल: प्रोजेक्ट में 8.92 किमी और 1.75 किमी लंबी दो विशाल सुरंगें बनाई गई हैं. 23.75 मीटर की चौड़ाई के साथ ये दुनिया की सबसे चौड़ी सुरंगों में शुमार हैं. इनमें से एक सुरंग तो सीधे लोणावला झील के नीचे से होकर गुजरती है.

आम जनता को क्या-क्या होंगे फायदे?

  • सफर होगा सुपरफास्ट: इस रूट के खुलने से मुंबई से पुणे की दूरी करीब 6 किलोमीटर कम हो जाएगी, जिससे यात्रियों के पूरे 30 मिनट बचेंगे.
  • दुर्घटनाओं पर लगेगी लगाम: घाट सेक्शन के खतरनाक और घुमावदार मोड़ों से छुटकारा मिलेगा, जिससे सड़क हादसों में भारी कमी आने की उम्मीद है.
  • नहीं लगेगा एक्स्ट्रा टोल: यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत की खबर यह है कि इस हाई-टेक रास्ते से गुजरने के लिए उन्हें अपनी जेब और ढीली नहीं करनी पड़ेगी. इस पर कोई अतिरिक्त टोल नहीं लगाया जाएगा.
  • ईंधन की होगी बचत: जाम में नहीं फंसने और स्मूद ड्राइव के कारण गाड़ियों का फ्यूल खर्च भी कम होगा.
  • अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट: कनेक्टिविटी तेज होने से व्यापार और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को सीधा फायदा पहुंचेगा.

शुरुआत में इन्हें मिलेगी प्राथमिकता

प्रशासनिक जानकारी के अनुसार, सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए शुरुआत में इस नए 'मिसिंग लिंक' मार्ग पर कार और बसों जैसे हल्के वाहनों को ही प्राथमिकता दी जाएगी. वहीं, भारी वाहनों और ट्रकों को पुराने मार्ग (घाट सेक्शन) से ही डाइवर्ट किया जा सकता है.

देश के सबसे व्यस्त हाईवे में से एक, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे की तस्वीर इस प्रोजेक्ट के बाद पूरी तरह से बदल जाएगी. 1 मई से यह रूट लाखों यात्रियों के सफर को न सिर्फ तेज, बल्कि बेहद सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने वाला है.

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