महाराष्ट्र में निकाय चुनाव, खासकर BMC इलेक्शन से पहले कांग्रेस ने ऐलान कर दिया है कि पार्टी अपने दम पर अकेले चुनाव लड़ेगी. यानी कांग्रेस विपक्षी गठबंधन महाविकास अघाड़ी (MVA) से अलग होकर चुनावी मैदान में उतरना चाहती है. इसकी वजह ठाकरे भाइयों का साथ आना और खासतौर पर राज ठाकरे से नाराजगी है. हालांकि, शरद पवार से कांग्रेस की कोई अनबन नहीं है. ऐसे में ठाकरे बंधुओं से नाराजगी का नुकसान क्या शरद पवार को भी झेलना पड़ेगा?

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इन सब सवालों के बीच बुधवार, 19 नवंबर की सुबह एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जिससे महाराष्ट्र के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है. दरअसल, बीएमसी चुनाव को लेकर मुंबई कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मिलने उनके आवास सिल्वर ओक पर पहुंचा.

कांग्रेस के इस प्रतिनिधिमंडल में वर्षा गायकवाड़ के नेतृत्व में अमीन पटेल, असलम शेख और ज्योति गायकवाड़ शरद पवार के आवास पर पहुंचे थे. माना जा रहा है कि यह मुलाकात आगामी स्थानीय निकाय चुनावों से पहले गठबंधन की रणनीतियों पर चर्चा करने के लिए हुई है. 

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कांग्रेस नहीं चाहती शरद पवार और ठाकरे भाइयों का गठबंधन हो?

कयास लगाए जा रहे हैं कि कांग्रेस के सीनियर नेताओं और शरद पवार की इस मुलाकात के कई एंगल हो सकते हैं. पहली बात तो यह कि कांग्रेस का प्रयास है कि शरद पवार की एनसीपी उनके साथ कुछ सीटों पर गठबंधन में रहे और उद्धव-राज ठाकरे से गठबंधन न करे. 

कांग्रेस नहीं चाहती कि उसके बिना एमवीए का गठबंधन अब उद्धव-राज और शरद पवार का गठबंधन हो जाए. ऐसे में कांग्रेस की कोशिश रहेगी कि शरद पवार भी उद्धव ठाकरे के साथ गठबंधन तोड़ दें. 

क्या अकेले लड़ने के फैसले से समझौता करेगी कांग्रेस? 

अब सवाल यह उठता है कि कांग्रेस जब पहले ही कई मौकों पर यह ऐलान कर चुकी है कि निकाय चुनाव में अकेले अपने दम पर सभी सीटों पर उम्मीदवार उतारना है, तो अब शरद पवार से मुलाकात कर गठबंधन क्यों करना चाहती है? क्या कांग्रेस अकेले लड़ने का फैसला वापस लेगी? 

क्या शरद पवार भी छोड़ देंगे उद्धव ठाकरे का साथ?

कांग्रेस नेताओं और शरद पवार की मुलाकात से यह कयास भी लगाए जा रहे हैं कि एनसीपी-एसपी अब कांग्रेस के साथ मिलकर निकाय चुनाव की रणनीति पर फैसला कर सकती है. यह तो तय है कि कांग्रेस उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर इलेक्शन नहीं लड़ेगी. ऐसे में क्या शरद पवार भी ठाकरे बंधुओं का साथ छोड़ देंगे? 

इन सब सवालों का जवाब तो पार्टी के दिग्गज नेताओं के आधिकारिक बयान के बाद ही मिल सकता है, लेकिन अभी तक न ही उद्धव ठाकरे-राज ठाकरे, न ही शरद पवार और न ही कांग्रेस के किसी नेता का एमवीए की स्थिति को लेकर कोई बयान आया है. ऐसे में विपक्षी गठबंधन दल की स्थिति कंफ्यूजन में है.