नीट पेपर लीक मामले में जंतर-मंतर के साथ देशव्यापी आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे से राजनीतिक हलचल तेज हो गयी है. कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले एक महीने से अधिक समय से छात्रों-युवाओं का आंदोलन चल रहा था. 20 जुलाई को हुई हिंसा के बाद मामला और बिगड़ रहा था, जिसके बाद आज आखिरकार शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया.

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धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर प्रत्रिक्रिया देते हुए शिवसेना(UBT) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने कहा, "धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा सिर्फ शुरुआत है. मोदी-शाह अजेय नहीं हैं… वे भी जाएंगे.” राउत ने आगे कहा कि पेपर लीक से शुरू हुई यह लड़ाई अब पूरे सिस्टम की जवाबदेही की लड़ाई बन चुकी है. उन्होंने युवाओं और छात्रों के आंदोलन को बधाई दी और कहा कि करोड़ों युवाओं ने अपनी शक्ति से साबित कर दिया है कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सबसे ऊपर है.

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एक महीन से चल रहा था आंदोलन 

यहां बता दें कि कॉकरोच जनता पार्टी के बैनर तले छात्रों-युवाओं का आंदोलन चल रहा था, जिसमें नीट परीक्षा में कार्रवाई और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का इस्तीफा होना चाहिए. सोनम वांगचुक समेत कई छात्र और युवाओं ने इसको लेकर भूख हड़ताल भी की. लेकिन सरकार पर कोई फर्क नहीं पड़ा. इधर 20 जुलाई को संसद मार्च के आह्वान पर हिंसा भड़क गयी. जिसमें पुलिस की लाठीचार्ज से कई छात्र और युवा गंभीर रूप से घायल हैं.

इसके बाद छात्रों और युवाओं का गुस्सा सातवें आसमान पर बढ़ गया. विपक्ष ने भी लाठीचार्ज को गलत ठहराते हुए जिम्मेदार पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की. इसको लेकर संसद में भी गहमा-गहमी रही और मानसून का पहला सप्ताह बिना किसी चर्चा के ही बीत गया.

विपक्षी दलों ने छात्रों और युवाओं की जीत बताया 

शिक्षा मंत्री मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्षी दलों की भी प्रतिक्रियाएं आ रहीं हैं. आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने भी युवाओं को बधाई दी. उन्होंने लिखा युवा शक्ति जिंदाबाद, छात्र शक्ति जिंदाबाद, पेपर लीक से शुरू हुई लड़ाई रोजगार तक जाएगी,.

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